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रायबरेली में PMGSY सड़कों की बदहाली पर केएल शर्मा ने उठाए सवाल, राहुल गांधी ने मांगा जवाब

Raebareli Roads Under Fire: रायबरेली में PMGSY सड़कों की खराब हालत पर कांग्रेस सांसद केएल शर्मा ने सवाल उठाए। राहुल गांधी ने प्रशासन से सड़क में गड्ढों और जिम्मेदारी पर जवाब मांगा।
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रायबरेली में PMGSY सड़क की स्थिति को लेकर जानकारी देते कांग्रेस सांसद केएल शर्मा। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

रायबरेली में PMGSY सड़क की स्थिति को लेकर जानकारी देते कांग्रेस सांसद केएल शर्मा। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

Raebareli Road Condition: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़कों की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता और उनके रखरखाव को लेकर कांग्रेस सांसद केएल शर्मा ने रायबरेली में प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि PMGSY सड़कों के निर्माण के बाद ठेकेदार के लिए पांच साल तक सड़क के रखरखाव की व्यवस्था नियम के तहत होती है। ऐसे में यदि सड़क बनने के दो साल भी पूरे नहीं हुए और उसमें गड्ढे दिखाई देने लगे हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों से कार्रवाई को लेकर सवाल किया जाना स्वाभाविक है।

केएल शर्मा ने यह बात लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष PMGSY सड़कों की स्थिति को लेकर उठाए गए मुद्दे के संदर्भ में कही। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने अधिकारियों के सामने मुख्य रूप से इसी बात को रखा कि जिस सड़क का निर्माण हुए अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, वहां गड्ढे कैसे हो गए और सड़क की खराब स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जा रही है।

पांच साल के रखरखाव का नियम

PMGSY के तहत ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। योजना के तहत बनाई जाने वाली सड़कों की गुणवत्ता और उनके रखरखाव को लेकर निर्धारित प्रावधान होते हैं। केएल शर्मा के मुताबिक, निर्माण एजेंसी या ठेकेदार की जिम्मेदारी सड़क निर्माण के बाद भी तय अवधि तक बनी रहती है। उन्होंने इसी प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि जब सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी पांच साल तक निर्धारित है, तो निर्माण के महज दो वर्ष के भीतर सड़क पर गड्ढे दिखाई देना गंभीर विषय है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप बनी है और उसका रखरखाव भी समय-समय पर किया जाना है, तो इतनी कम अवधि में उसकी स्थिति खराब होने के पीछे वजह क्या है। उनका कहना था कि संबंधित विभाग को इस मामले में जांच कर यह देखना चाहिए कि सड़क के निर्माण में गुणवत्ता के मानकों का पालन हुआ था या नहीं और बाद में उसके रखरखाव की जिम्मेदारी निभाई गई या नहीं।

राहुल गांधी ने प्रशासन के सामने उठाया मुद्दा

कांग्रेस सांसद केएल शर्मा ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिले में सड़क की स्थिति को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़ी होती हैं। खराब सड़क का असर आवागमन के साथ-साथ विद्यार्थियों, किसानों, मरीजों और व्यापारियों पर भी पड़ता है।

राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवाल का केंद्र यह बताया गया कि कम समय में सड़क खराब होने के बाद संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। यदि सड़क की हालत निर्माण के कुछ समय बाद ही खराब हो जाती है तो उसकी गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर प्रशासन और संबंधित विभागों से जवाब मांगे जाने की बात सामने आई है।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, निर्माण की तकनीक, जलनिकासी की व्यवस्था और यातायात के दबाव जैसे कई कारण सड़क की उम्र और गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में किसी सड़क के जल्दी खराब होने की स्थिति में तकनीकी जांच के जरिए वास्तविक कारण सामने लाना जरूरी माना जाता है।

यदि किसी सड़क पर निर्माण के दो वर्ष के भीतर ही बड़े-बड़े गड्ढे बन जाएं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित मानकों का कितना पालन किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय बनता है कि सड़क बनने के बाद नियमित निरीक्षण और मरम्मत की व्यवस्था किस स्तर पर की गई।

जिम्मेदारी तय करने की मांग

केएल शर्मा ने जिस मुद्दे को सामने रखा है, उसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल जिम्मेदारी तय करने का है। यदि सड़क अभी रखरखाव की निर्धारित अवधि में है और उसमें गड्ढे हो चुके हैं, तो संबंधित एजेंसी से सड़क की मरम्मत कराए जाने के साथ-साथ गुणवत्ता की जांच भी की जानी चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि समस्या निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ी है या रखरखाव में लापरवाही के कारण सड़क खराब हुई।

सड़क निर्माण से जुड़े मामलों में अक्सर स्थानीय लोगों की शिकायत रहती है कि सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसकी सतह उखड़ने लगती है या गड्ढे बनने लगते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते मरम्मत न होने पर समस्या और बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में जलभराव होने से गड्ढे और खतरनाक हो सकते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है।

ग्रामीण इलाकों में सड़कें विकास की रीढ़

PMGSY जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। गांवों से मुख्य मार्गों और बाजारों तक बेहतर संपर्क होने से कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल-कॉलेज पहुंचने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलती है। इसलिए इन सड़कों का निर्माण केवल सड़क बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता और लंबे समय तक उपयोगी बने रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

रायबरेली में PMGSY सड़कों को लेकर उठे सवाल इसी व्यापक मुद्दे की ओर इशारा करते हैं। सड़क बनने के दो साल के भीतर ही गड्ढे होने की शिकायत सामने आने पर अब निगाहें संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई पर हैं। यदि तकनीकी जांच में निर्माण या रखरखाव में कमी सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की जरूरत होगी।

अब कार्रवाई पर टिकी नजर

फिलहाल कांग्रेस सांसद केएल शर्मा ने राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवाल के संदर्भ में PMGSY सड़कों की स्थिति और ठेकेदार की रखरखाव संबंधी जिम्मेदारी का मुद्दा प्रमुखता से रखा है। उनका कहना है कि जब सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी पांच साल तक तय है, तो निर्माण के दो वर्ष के भीतर सड़क में गड्ढे होने पर संबंधित पक्ष से जवाब मांगा जाना चाहिए।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। सड़क की तकनीकी जांच, निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसी से जवाब तलब किए जाने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल PMGSY सड़कों को लेकर उठे सवालों ने ग्रामीण सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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