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मिलरों के तीन करोड़ के घपले पर डाली मिट्टी, अब प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी में शासन

इसके लिए विपणन विभाग के प्रबंध संचालक ने बकायदा एक निर्देश जारी किया है।
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रायगढ़

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Shiv Singh

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Updated: 14 Jun 2018, 12:41 PM IST

मिलरों के तीन करोड़ के घपले पर डाली मिट्टी, अब प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी में शासन

मिलरों के तीन करोड़ के घपले पर डाली मिट्टी, अब प्रोत्साहन राशि देने की तैयारी

रायगढ़. डीओ की खरीद-बिक्री का मामला हो चाहे क्षमता कम दिखाकर तीन करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि हासिल कर शासन को चपत लगाने का मामला हो अब इन सभी मामलों में मिलरों को प्रशासन व शासन ने अभयदान दे दिया है। अलबत्ता यह कि अब जिले के इन राइसमिलरों को शासन प्रोत्साहनदान देने की तैयारी में है। इसके लिए विपणन विभाग के प्रबंध संचालक ने बकायदा एक निर्देश जारी किया है। जिसमें यह बताया गया है कि जिस जिले में मासिक क्षमता के अनुरूप २ माह का धान उपलब्ध है और वहां के मिलर मिलिंग क्षमता का ६० प्रतिशत धान उठाव करता है तो उसको प्रोत्साहन राशि दिया जाए।

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पिछले दिनों कस्टम मिलिंग में प्रोत्साहन राशि को लेकर प्रबंधक संचालक ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें प्रोत्साहन राशि के लिए तीन बिंदु निर्धारित किए गए हैं। इसमें जिले में धान की उपलब्ध मात्रा और पंजीकृत राइसमिलर के मिलिंग क्षमता को देखते हुए प्रोत्साहन राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है।

अब यदि स्थिति की समीक्षा करें तो इन बिंदुओं को समझने में आसानी होगी। विदित हो कि जिले में १०४ अरवा मिल पंजीकृत है। वहीं २०१७-१८ में जिले में पंजीकृत उक्त मिलरों की मासिक क्षमता १ लाख २६ हजार ५०० टन है और जिले में उपलब्ध धान २ लाख २५ हजार ५९० टन धान था। इस हिसाब से देखा जाए तो जिले में पंजीकृत मिलरों के क्षमता के हिसाब से २ माह का धान जिले में उपलब्ध था।
इस हिसाब से देखा जाए तो प्रबंधक संचालक के निर्देश में दिए गए बिंदु क्रमांक २ के अनुसार मिलवार समीक्षा कर जिन मिलरों ने दिसंबर २०१७ एवं जनवरी २०१८ में मिलिंग क्षमता का ६० प्रतिशत धान उठाव किया है ऐसे मिलरों को प्रोत्साहन राशि देने कहा गया है। जबकि गौर किया जाए तो मिलरों को प्रोत्साहन राशि जारी करने लायक धान ही उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद भी उक्त निर्देश जारी कर मिलरों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
इसमें भी कोई कार्रवाई नहीं
राइसमिलरों को पहले तो मार्च तक उत्पादन प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद तिथि बढ़ाकर अप्रैल अंत तक जमा करने के लिए अल्टीमेटम दिया गया, लेकिन जून खत्म होने की स्थिति में है। अभी तक मिलरों ने खाद्य विभाग में उत्पादन प्रमाण पत्र जमा नहीं किया है। इस मामले में जिला स्तर पर अलग-अलग विभागों ने शासन से मार्गदर्शन मांगा है लेकिन मार्गदर्शन देने के बजाए उल्टा प्रोत्साहन राशि देने निर्देश जारी किया गया है।