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Social pride : तीन दिन तक भूखा रहा, मिर्च पावडर खाकर मिटाई भूख, पर जिंदा रखा कलाकार को

कहानी किसी फिल्म के स्क्रिप्ट से कम नहीं
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रायगढ़

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Shiv Singh

•

Updated: 14 Jul 2018, 1:47 PM IST

 कहानी किसी फिल्म के स्क्रिप्ट से कम नहीं

कहानी किसी फिल्म के स्क्रिप्ट से कम नहीं

रायगढ़. उसका घर महानदी की बाढ़ में गिर गया था, घर में खाने को कुछ नहीं था, वो तीन दिन तक भूखा था, चौथे दिन भूख इतनी तेज हुई थी मिर्च पावडर के दो पैकेट रोता हुआ खा गया। इस कठिन संघर्ष में भी उम्मीद के दामन को नहीं छोड़ा, अपने कलाकार को मरने नहीं दिया। उसके इस संघर्ष को एक नया आयाम तब मिला जब वो सीएम के हाथों सम्मानित हुआ।

पेट में जब भूख की प्रचंड आग जलती है तो इंसान के पास दो ही रास्ते होते हैं एक या तो टूट कर बिखर जाए या फिर लड़कर संवर जाए। ऐसी ही कहानी है बरमकेला ब्लाक के परसरामपुर गांव के एक युवा कलाकार तोष कुमार साहू की। इसकी कहानी किसी फिल्म के स्क्रिप्ट से कम नहीं है जिसमें आंसू, दर्द और संघर्ष की अलग-अलग दास्तान है।


युवा कलाकार तोष कमुार साहू ने बताया कि उसके घर की माली हालत ठीक नहीं थी। मां भठली के आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता हैं और पिता किसान हैं। बचपन से ही उसमें मिट्टी और काष्ट कला के प्रति लगन था, वो बकायदा कलाकृतियां बनाकर बेचा करता था। काफी मुश्किल से 11 वीं तक की पढ़ाई पूरी की, 12 की पढ़ाई गरीबी के वजह से पूरा नहीं कर सका। साहू ने बताया कि उसका गांव महानदी के पास है।

ऐसे में अपने सफर की शुरुआत की कहानी के विषय में उसने बताया कि गांव में बाढ़ आ गई, उसका मकान गिर गया, घर में कुछ बचा नहीं था। तीन दिन तक उसका परिवार पानी पी कर गुजारा करता रहा। इसके बाद तोषकुमार अपने गांव से निकलकर रायगढ़ पहुंचा।


रायगढ़ पहुंचकर सहयोग समिति नाम के एनजीओ से मदद ली, एनजीओ ने मदद भी की और धरमजयगढ़ में बसोड़ परिवार को बांस एवं काष्ठ कला के ट्रेनिंग का काम दिया। चौथे दिन वो अपने एक वरिष्ठ के साथ धरमजयगढ़ पहुंच गया। तोष कुमार ने बताया कि भूख के कारण उसकी हालत खराब थी। ऐसे में साथ गए वरिष्ठ ने उससे कहा कि तुम यहीं ठहरो मैं भोजन लेकर आता हूं। पर वो किसी काम में व्यस्त होने के कारण भूल गए।


मास्टर ट्रेनर के रूप में
संघर्ष के आरंभिक दिनों के बाद तोष कुमार का कैरियर मास्टर ट्रेनर के रूप में स्थापित हो गया, माली हालत भी सुधरी वहीं कला में निखार आया। वर्तमान में तोषकुमार शहर के एक निजी स्कूल में आर्ट टीचर के रूप में पदस्थ है और अपनी कला का ज्ञान बच्चों में बांटकर उनके अंदर के कलाकार को उभार रहा है।

युवा कलाकार तोष कुमार साहू ने बताया कि अब उसका सपना है कि उसकी सबसे उत्तम काष्ठ कलाकृति जिसे उसने मां का प्यार नाम दिया है, को देश के राष्ट्रपति को भेंट करूं। इस मूर्ति में बच्चे की भूख, परिस्थितियों का दर्द और मां के करुणा का समागम है।

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सीएम से सम्मानित
तोषकुमार ने बताया कि उसके कला और संघर्ष का पहला फल साल 2014 में मिला जब चक्रधर समारोह के स्टेज पर उसके कला का सम्मान करते हुए सीएम ने उसे सम्मानित किया। इसके बाद राज्यसभा सांसद नंद कुमार साय, तात्कालीन कलक्टर मुकेश बंसल आदि ने भी इसका सम्मान किया।


अंत में इसने मिर्च पावडर से बुझाई भूख
तोष कुमार ने बताया कि जब उसके वरिष्ठ काफी देर तक नहीं आए और भूख से उसकी हालत खराब होने लगी तो वो एक नीम के पेड़ पर चढ़ गया ताकि पत्तियों को खाकर अपनी भूख मिटा सके पर वो सफल नहीं हुआ वो पेड़ से नीचे गिर गया, चोट भी आई। इसके बाद कमरे के अंदर कुछ खाने का सामान ढूंढने लगा।

इसी दौरान उसके वरिष्ठ सहयोगी के बैग में महिला समूह का बनाया हुआ मिर्च का पैकेट दिखा। ऐसे में वो दो मिर्च पावडर के पैकेट को खा गया और रोता हुआ पानी पीकर सो गया। बाद में जब उसके वरिष्ठ को इसकी जानकारी हुई तो वो भी काफी फूट-फूटकर रोए थे।