पिछले वर्ष के ऐसे पंजीकृत किसान जिन्होने पंजीयन तो कराया था, लेकिन धान का विक्रय नहीं किया ऐसे रकबे का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है जिसमें कई भूमि पड़त भूमि मिल रही है तो कई भूमि में उत्पादन कम मिल रहा है। पड़त भूमि का भी पिछले बार पंजीयन कर दिया गया था जिसमें गिरदावरी में धान दिखाया गया था। अब तक ऐसे 12 हजार हेक्टेयर भूमि का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है और उक्त भूमि का पंजीयन इस बार भी नहीं होगा।