24 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

AIIMS Raipur: एम्स में मरीजों के इलाज के लिए होगा AI का इस्तेमाल, बीमारी की पहचान से डॉक्टरों के फैसले तक मिलेगी मदद

Raipur Aiims News: रायपुर में मरीजों के इलाज और अस्पताल प्रबंधन में AI का इस्तेमाल होगा। बीमारी की पहचान, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और मरीजों के स्वास्थ्य की निगरानी में AI मदद करेगा।
2 min read
Google source verification
AIIMS Raipur

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स (photo Patrika)

Raipur Aiims: मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने और अस्पताल की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में एम्स रायपुर और एनआईटी रायपुर ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों संस्थानों के बीच AI आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। यह समझौता एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप और एम्स रायपुर के बीच छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन AI के तहत किया गया है।

बीमारी की पहचान में AI करेगा मदद

एम्स और एनआईटी के बीच सहयोग के तहत बीमारी की पहचान और AI आधारित डायग्नोस्टिक्स पर विशेष काम किया जाएगा। AI तकनीक के जरिए उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर बीमारी की पहचान में डॉक्टरों को मदद देने वाले समाधान विकसित किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य डॉक्टरों की जगह AI को लाना नहीं, बल्कि चिकित्सकों को बेहतर और तेज निर्णय लेने के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।

इलाज में डॉक्टरों को मिलेगा क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट

समझौते के तहत क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम विकसित करने की दिशा में भी काम होगा। AI मरीज से संबंधित उपलब्ध जानकारी और मेडिकल डेटा का विश्लेषण कर डॉक्टरों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में सहायता कर सकेगा। ऐसी तकनीक विशेष रूप से जटिल मामलों में डॉक्टरों को उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित तरीके से समझने और संभावित विकल्पों का आकलन करने में मदद कर सकती है।

मरीज के स्वास्थ्य का लगाया जाएगा अनुमान

AI के जरिए प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स पर भी काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य मरीज के स्वास्थ्य से जुड़े उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर संभावित स्वास्थ्य जोखिमों या भविष्य की स्थिति का अनुमान लगाने में चिकित्सकों की सहायता करना है। इससे मरीजों की निगरानी और उपचार की योजना को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

अस्पताल की व्यवस्थाओं को भी बनाएगा स्मार्ट

AI का उपयोग सिर्फ मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा। अस्पताल के संचालन और प्रबंधन में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे। अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी में सुधार और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ कम करने तथा मरीजों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

एम्स बताएगा समस्या NIT तैयार करेगा समाधान

समझौते के तहत दोनों संस्थानों की भूमिकाएं अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़ी रहेंगी। एम्स रायपुर डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुभव के आधार पर वास्तविक स्वास्थ्य समस्याओं और तकनीकी जरूरतों की पहचान करेगा। वहीं एनआईटी रायपुर का AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अपने शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप, प्रयोगशालाओं और कंप्यूटिंग सुविधाओं की मदद से इन समस्याओं के लिए तकनीकी समाधान विकसित करेगा। इस तरह चिकित्सा क्षेत्र की वास्तविक जरूरत और तकनीकी विशेषज्ञता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

विद्यार्थियों को भी मिलेंगे नए अवसर

एम्स-एनआईटी की यह साझेदारी विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। समझौते के तहत विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, हैकाथॉन और कौशल विकास से जुड़े अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। मेडिकल क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं पर काम करने से AI और तकनीकी क्षेत्र के विद्यार्थियों को हेल्थकेयर से जुड़ी चुनौतियों को समझने और उनके लिए समाधान विकसित करने का व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा। वहीं स्टार्टअप और शोधकर्ताओं को भी स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों पर आधारित तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा।