
मां नहीं बन पा रही महिलाओं के लिए खुलेगा IVF सेंटर, नौ पदों पर की जाएगी भर्ती, जानें पूरी detail(photo-patrika)
IVF Center in Raipur: पीलूराम साहू। छत्तीसगढ़ के रायपुर में लंबे समय से मां नहीं बन पा रही महिलाओं के लिए आंबेडकर अस्पताल के ऑब्स एंड गायनी विभाग में आईवीएफ सेंटर शुरू होगा। यह सेंटर महिलाओं के लिए संजीवनी साबित होगा। दरअसल निजी अस्पतालों में आईवीएफ पद्धति से मां बनने से खर्च का कोई हिसाब नहीं है। जबकि आंबेडकर अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के पैकेज में नि:शुल्क इलाज होगा।
इससे लंबे समय से मां बनने का सपना देखने वाली महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध आंबेडकर अस्पताल में आईवीएफ सेंटर खुलने से कम खर्च पर महिलाएं मां बन सकेंगी। ये तकनीक उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा, जो सामान्य तरीके से गर्भधारण नहीं कर पा रहे हैं। उनके लिए आईवीएफ तकनीक रामबाण साबित होगी।
डॉक्टरों के अनुसार आंबेडकर में हर माह 60 से 70 महिलाएं आती हैं, जो मां नहीं बनने पर आईवीएफ तकनीक से मां बनने की इच्छा जाहिर करती हैं। वर्तमान में ये सुविधा एम्स में भी नहीं है। इसलिए महिलाओं के पास निजी आईवीएफ सेंटर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। राजधानी समेत प्रदेश में करीब 20 निजी सेंटर है, जहां कोई निश्चित खर्च का अनुमान लगाना मुश्किल है।
हालांकि कई आईवीएफ सेंटर पैकेज के तहत महिलाओं का इलाज करती हैं। इसमें कई महिलाएं मां बन जाती हैं, वहीं कई को असफलता हाथ लगती है। देखने में आया है कि कई बार जरूरतमंद परिवारों को कर्ज लेकर इलाज कराना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी अस्पताल में आईवीएफ सेंटर खुलने से जरूरतमंद महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक प्रजनन तकनीक है, जिसमें अंडे और शुक्राणु को शरीर के बाहर एक लैब में मिलाया जाता है, जिससे भ्रूण बनता है। इसे बाद में महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है। गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार महिला का हार्मोनल इलाज दिया जाता है ताकि अंडाशय में कई अंडे विकसित हों।
विकसित अंडों को एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाता है। पुरुष से स्पर्म संग्रह किया जाता है। अंडे और शुक्राणु को लैब में मिलाया जाता है, जिससे भ्रूण बनता है। फैलोपियन ट्यूब में रुकावट होने पर आईवीएफ एक विकल्प है।
अस्पताल में आईवीएफ सेंटर बनने से उन महिलाओं को मां बनने का अवसर मिलेगा, जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रही है। गायनी विभाग में इसके लिए जरूरी तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में जरूरी स्टाफ व विशेषज्ञों की भर्ती भी की जाएगी।-डॉ. विवेक चौधरी, डीन नेहरू मेडिकल कॉलेज
राज्य सरकार ने आईवीएफ सेंटर के लिए मार्च में पेश बजट में 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ऑब्स एंड गायनी विभाग से इसका प्रस्ताव मंगाया था। जरूरी स्टाफ की भी भर्ती की जाएगी। उपकरण व मशीन भी खरीदे जाएंगे।
सेंटर में एंड्रोलॉजिस्ट समेत नौ पदों पर भर्ती की जाएगी। एंड्रोलॉजिस्ट का एक पद, एंब्रियोलॉजिस्ट के दो, एमएससी बायो टेक्नोलॉजिस्ट के चार व काउंसलर के दो पदों पर भर्ती होगी। टेक्नीशियन जरूरी जांच में मदद करेंगे। गायनेकोलॉजिस्ट यहां पहले से सेवाएं दे रही हैं। उन्हें विशेष ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी।
Updated on:
22 Sept 2025 11:02 am
Published on:
22 Sept 2025 11:00 am
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