
ईडी की हिरासत में बलरामपुर अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बोरघरिया ( Photo - एक्स@/dir_ed)
CGPSC Scam Update: प्रदेश के बहुचर्चित सीजीपीएससी परीक्षा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुलासा किया है कि किस तरह एक संगठित सिंडिकेट बनाकर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की ठगी की गई। इस मामले में ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया था। विशेष अदालत ने आरोपी अधिकारी को 6 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया था। यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2020 और 2021 की सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं, पर्चा लीक और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई है।
इससे पहले ईडी ने एक सितंबर को बोरघरिया के धमतरी और बलरामपुर स्थित परिसरों पर छापेमारी की थी। ईडी की जांच में सामने आया कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने मिलकर एक सिंडिकेट बनाया था। इस गिरोह ने अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर चयन पक्का कराने का झांसा दिया। इसके एवज में अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध रिश्वत वसूली गई।
इस पूरे नेटवर्क में अभ्यर्थियों का विश्वास जीतने के लिए तत्कालीन ओएसडी चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का खुलकर इस्तेमाल किया गया। ईडी को यह भी संदेह है कि इस अवैध कमाई की लेयरिंग (पैसों को छुपाने और हेरफेर करने) के लिए मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का इस्तेमाल किया गया था।
प्रारंभिक परीक्षा से ठीक पहले चुनिंदा उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में इकट्ठा किया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर लीक प्रश्न पत्र बांटे गए। मुख्य परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को बारनवापारा अभयारण्य रिज़ॉर्ट में ठहराया गया। वहां लीक हुए प्रश्न पत्रों के आधार पर उन्हें बाकायदा तैयारी व कोचिंग कराई गई। वित्तीय जांच के दौरान ईडी को चेतन बोरघरिया और मुख्य आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के बीच सीधे वित्तीय लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं। संबंधित अवधि के दौरान बोरघरिया के बैंक खाते में उत्कर्ष चंद्राकर द्वारा 170 किस्तों के माध्यम से कुल 66.64 लाख रुपए की नकद राशि जमा कराई गई थी।
1 सितंबर को की गई छापेमारी के दौरान बोरघरिया के ठिकानों से मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव जैसे कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। फॉरेंसिक जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच रुपयों के लेन-देन, भुगतान की मांग और पैसों की वापसी से जुड़ी बातचीत व चैट के पुख्ता प्रमाण सामने आए हैं।
सीजीपीएससी घोटाले की शुरुआती जांच ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। बाद में राज्य सरकार के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी। उसी प्रिडिकेट ऑफेंस के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और डिजिटल व बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया। मामले में आगे की जांच जारी है।
Updated on:
15 Sept 2026 11:08 am
Published on:
15 Sept 2026 10:56 am
