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50 हजार से लाखों रुपए तक के रिफंड के लिए पहुंचे आवेदन, पर नही हुआ निराकरण

वैट पद्धति के रिफंड के लिए आवेदन मंगाने के बाद विभागीय लेटलतीफी की वजह से डीलर्स को इंतजार करना पड़ रहा है
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रायपुर

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Deepak Sahu

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Updated: 30 Jul 2018, 10:05 AM IST

cgnews

50 हजार से लाखों रुपए तक के रिफंड के लिए पहुंचे आवेदन, पर अब तक नही मिला पैसा

रायपुर. वैट पद्धति के रिफंड के लिए आवेदन मंगाने के बाद विभागीय लेटलतीफी की वजह से डीलर्स को इंतजार करना पड़ रहा है। वाणिज्यिक कर विभाग में वर्ष 2011-12 से वैट पद्धति लागू रहने के समय से 2017 तक रिफंड के लिए अब तक सैकड़ों आवेदन विभाग में दिए जा चुके हैं। जानकारी के मुताबिक विभाग में लगभग 45 हजार कारोबारियों के 50 करोड़ रुपए तक का रिफंड अटका हुआ है। जीएसटी लागू होने के बाद विभाग ने इनकी सुध नहीं ली। जानकारी के मुताबिक वाणिज्यिक कर विभाग में पंजीकृत व्यापारियों ने 50 हजार रुपए से लेकर 1 करोड़ तक के रिफंड के लिए क्लेम किए है। इससे पहले विभाग ने दावा किया था कि 10 दिनों के भीतर रिफंड वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, लेकिन सेल टैक्स बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक अब तक रिफंड को लेकर विभाग ने तत्परता नहीं दिखाई है, जबकि आवेदनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रिफंड के सबसे ज्यादा आवेदन लोहा, स्टील, स्पंज आयरन, फॉरेस्ट प्रोडक्ट,ऑटोमोबाइल्स आदि सेक्टर में अधिक है। विभागीय आयुक्त पी. संगीता ने बताया कि रिफंड के आवेदन को निराकृत करने के लिए सभी डिवीजन को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। पात्र डीलर्स को रिफंड किया जाएगा।

जीएसटीआर-1 अब तीन महीने में एक बार: बिक्री के संबंध में जीएसटीआर-1 रिटर्न अब तीन महीने में एक बार देना होगा, जबकि जीएसटी-3बी और जीएसटीआर-2 रिटर्न में छूट नहीं दी गई है। यह नियम जुलाई महीने से लागू हो चुका है। व्यापारियों को खरीदी-बिक्री के संबंध में मासिक विवरणी में छूट नहीं दी गई है। जीएसटीआर-1 में 5 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले कारोबारियों को त्रैमासिक रिटर्न की सुविधा मिलेगी। प्रदेश में ऐसे डीलर्स की संख्या लगभग 85 फीसदी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे डीलर्स जिन्होंने विदेशों में अपने उत्पाद का निर्यात किया है। विदेशी निर्यात पर टैक्स शून्य है, लेकिन उत्पाद की लागत और निर्माण मेें जो टैक्स देना पड़ा, इसके लिए डीलर्स को रिफंड की पात्रता है। इसके साथ ही राज्य के बाहर निर्यात करने या बिक्री करने पर सी-फॉर्म के जरिए भी रिफंड लेने का अधिकार है।