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17 आदिवासियों की हत्या का मामला निकला फर्जी, SC ने याचिकाकर्ता पर लगाए 5 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 14 जुलाई को 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और छत्तीसगढ़ सरकार को एक कार्यकर्ता के खिलाफ "आपराधिक साजिश" के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया, जबकि उसने 2009 में आदिवासियों की कथित न्यायेतर हत्याओं के बाद एक याचिका पर अपना फैसला सुनाया.
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रायपुर

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Bhupesh Tripathi

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Updated: 14 Jul 2022, 7:10 PM IST

रायपुर. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2009 में लगाए एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा आदिवासियों की गैर- न्यायिक फांसी की कथित घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की थी. बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस जेबी पारदीवाला शामिल थे. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार पर पांच लाख रुपए का अनुकरणीय जुर्माना लगाया है.

छत्तीसगढ़ में 17 आदिवासियों की हत्या के मामले में 'झूठे आरोप' के लिए SC ने कार्यकर्ता पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. अन्य लोगों के साथ याचिकाकर्ता ने 2009 में सुरक्षा बलों पर दंतेवाड़ा जिले में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान 10 से अधिक आदिवासियों को गोली मारने का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया था. अदालत ने 2009 में छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के खिलाफ किए गए अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं के आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा, “छत्तीसगढ़ राज्य सबूतों को नष्ट करने, झूठे बयानों, आपराधिक साजिश या किसी अन्य अपराध के लिए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है.

याचिकाकर्ता कुमार के 2009 में दायर किए जनहित याचिका में दंतेवाड़ा जिले में हुए तीन अलग-अलग घटनाओं में 17 ग्रामीणों की मौत की गवाही पर आधारित थी. जब हिमांशु कुमार ने शीर्ष अदालत का रुख किया उसमे बताया गया था कि कैसे, सितंबर 2009 से अक्टूबर 2009 के बीच, सुरक्षा बल के जवानों ने न केवल अतिरिक्त न्यायिक हत्याएं की थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोगों के साथ बलात्कार और लूट भी की थी. कुमार ने यह भी दावा किया कि मृतक के परिवार के सदस्यों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षा बलों को आदिवासियों पर हमला किया, उन्हें करीब से गोली मारते और शवों को क्षत-विक्षत करते देखा था.

इस साल अप्रैल में, केंद्र ने भी 2009 में उनके द्वारा दायर एक जनहित याचिका के लिए कार्यकर्ता और छत्तीसगढ़ के 12 आदिवासियों के खिलाफ झूठी गवाही की कार्रवाई शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कहा गया था कि वे वामपंथी उग्रवाद के सदस्यों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की कोशिश कर रहे थे.