
Chhattisgarh Medical Colleges: PSC भर्ती की NMC योजना अटकी(photo-patrika)
Chhattisgarh Medical Colleges: छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी अब भी बरकरार है। प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 2660 स्वीकृत पदों में से 1290 पद खाली हैं। इस कमी को दूर करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के विशेषज्ञ डॉक्टरों को बिना पीएससी परीक्षा के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी बनाने की योजना तैयार की थी। हालांकि, प्रमोशन वाले पदों पर सीधे नियुक्ति को लेकर विवाद के कारण यह योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
एनएमसी की योजना के तहत जिला अस्पतालों और सीएचसी में कार्यरत एमडी, एमएस या डीएनबी डिग्रीधारी विशेषज्ञ डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी बनाने का प्रस्ताव था। इसके लिए पीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं थी। 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले डॉक्टरों को एसोसिएट प्रोफेसर और 2 वर्ष का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को असिस्टेंट प्रोफेसर बनाया जाना था।
प्रदेश में हाल ही में 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद फैकल्टी की जरूरत और बढ़ गई है। 220 से अधिक बेड वाले सरकारी अस्पतालों को टीचिंग हॉस्पिटल का दर्जा मिलने के कारण वहां कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टर भी मेडिकल छात्रों को पढ़ा सकते हैं, लेकिन भर्ती योजना पर निर्णय नहीं होने से समस्या बनी हुई है।
एनएमसी की योजना में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर जैसे प्रमोशन वाले पदों पर सीधे नियुक्ति का प्रावधान शामिल होने से विवाद खड़ा हो गया। मौजूदा नियमों के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर से 5 वर्ष बाद एसोसिएट प्रोफेसर और उसके बाद 3 वर्ष में प्रोफेसर बनाया जाता है। ऐसे में सीधी नियुक्ति से नियमित प्रमोशन प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
अभी प्रदेश में नियमित मेडिकल फैकल्टी की भर्ती छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से होती है। असिस्टेंट प्रोफेसर के चयन में केवल इंटरव्यू लिया जाता है, लिखित परीक्षा नहीं होती। वहीं संविदा डॉक्टरों की नियुक्ति संबंधित मेडिकल कॉलेजों में वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए की जाती है।
जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में कुल 2660 स्वीकृत पदों में 1290 रिक्त हैं। इनमें—
रिटायर्ड डीएमई डॉ. विष्णु दत्त के अनुसार, सरकारी अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी बनाने की एनएमसी की पहल अच्छी थी। हालांकि, प्रमोशन वाले पदों पर सीधी नियुक्ति से विवाद होना स्वाभाविक था। यदि योजना में प्रमोशन व्यवस्था को प्रभावित किए बिना नियुक्ति का प्रावधान किया जाता, तो मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी काफी हद तक दूर की जा सकती थी।
Updated on:
09 Aug 2026 07:33 am
Published on:
09 Aug 2026 07:33 am
