
CG News: छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में 15 साल बाद एक बार फिर चर्चित न्यू स्वागत विहार को लेकर हलचल तेज हुई है। दावा-आपत्ति के बाद अब स्क्रूटनी लगभग पूरी हो गई। बिल्डर के इस विवादित टाउनशिप में जितने लोगों ने भूखंड खरीदकर रजिस्ट्री कराए थे, उन सभी की शून्य हो गई है। ऐसे में उन्हें फिर से रजिस्ट्री कराना ही पड़ेगा। क्योंकि, निगम के अधिनियम-15 के तहत ऐसी प्रक्रिया की जा रही है। यही प्रस्ताव बनाकर राज्य शासन को भेजेंगे। इसके बाद ही निगम प्रशासन अपने हैंडओवर लेगा। वहीं, 209 रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब से विकास शुल्क देने पर प्रभावितों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं।
CG News: बिल्डर के इस 225 एकड़ के विवादित टाउनशिप में करीब 3 हजार लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें आज तक उनका भूखंड नहीं मिल पाया है। अब ऐसी नौबत आ गई है कि सभी प्रभावितों को फिर से रजिस्ट्री करानी पड़ेगी। क्योंकि, बिल्डर वाले सभी आठों लेआउट निरस्त करके नए लेआउट के आधार पर लोगों के भूखंड की सीमाएं बदल चुकी है। वहीं कई लोगों के पुरानी रजिस्ट्री में दर्ज भूखंड की जगह भी बदल गई है। इसलिए उन्हें किसी भी स्तिथी में दोबारा रजिस्ट्री कराना ही पड़ेगा। इससे पहले भूखंडधारियों के साथ हुई बैठक में सड़क, पानी, बिजली, नाली जैसी सुविधाएं विकसित करने के लिए विकास शुल्क तय हो गया है। इसलिए अब अवैध कॉलोनी के नियमितीकरण का रास्ता साफ होना बाकी है। इस पर निगम के इंजीनियर मशक्कत कर रहे हैं।
अवैध कॉलोनी घोषित होने पर भूखंडधारियों के बीच विकास शुल्क को लेकर भी पेंच फंसा हुआ था। नगर निगम पहले 250 से 300 रुपए लेने का प्लान किया था, परंतु न्यू स्वागत विभाग के प्रभावितों के साथ हुई निगम अफसरों की बैठक में 209 रुपए विकास शुल्क देने पर सहमति बन गई है। इस मुद्दे पर भूखंडधारियों ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। यानी कि 1 हजार वर्गफीट के भूखंड के लिए 2 लाख 9 हजार रुपए और 1500 वर्गफीट भूखंडधारियों को 3 लाख 13 हजार 500 रुपए विकास शुल्क देना पड़ेगा। तभी नगर निगम मूलभूत सुविधाएं विकसित करेगा।
न्यू स्वागत विहार में नगर निगम और ग्राम पंचायत बोरियाकला और सेजबाहर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जमीन शामिल हैं। निगम के अफसरों के अनुसार निगम में केवल डूंडा क्षेत्र आता है, जिसमें 800 से 900 लोगों के भूखंड हैं। बाकी दो हिस्से ग्रामीण क्षेत्र में हैं। इसलिए उन दोनों हिस्सों का विकास शुल्क अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विभाग तय करेगा।
बता दें कि राजधानी के डूंडा क्षेत्र में न्यू स्वागत विहार टाउनशिप की शुरुआत 2006 में शुरू और 2010 तक लगभग 3 हजार लोगों ने भूखंड खरीदे। इसके बाद निजी बिल्डर का यह पूरा प्रोजेक्ट 2011 में विवादों में घिर गया। 25 एकड़ सरकारी जमीन बिल्डर ने टाउन कंट्री प्लानिंग और राजस्व विभाग से मिलीभगत करके अपने लेआउट में शामिल करा लिया था। जब इसकी जांच और नाप-जोख हुई तो पूरे मामले सामने आ गया। तब से लेकर आज तक लोग अपने भूखंडों से वंचित हैं।
पिछली कांग्रेस सरकार में इस विवादित टाउनशिप के मसले को सुलझाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भूखंडधारियों को न्याय दिलाने के लिए आरडीए को नोडल एजेंसी तय किया। फिर अफसरों ने न्यू स्वागत विहार में भूखंड खरीदने वालों से दावा-आपत्ति लेकर नए सिरे से लेआउट बनाकर प्रस्ताव शासन को भेजा गया। इसके साथ ही स्वागत विहार अवैध कॉलोनी घोषित होने के साथ ही नियमितीकरण के लिए निगम और कलेक्ट्रेट के राजस्व विभाग के पास मामला पहुंचा।
Published on:
09 Sept 2024 12:42 pm
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