
Chhattisgarh Medical Education: DME के पत्र पर विश्वविद्यालय ने भेजा जवाब(photo-patrika)
Chhattisgarh Medical Education: पीलूराम साहू की रिपोर्ट. छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल शिक्षा शुरू करने की मांग को बड़ा झटका लगा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंस एवं आयुष विश्वविद्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा कानून के तहत निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल एजुकेशन से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। विश्वविद्यालय ने इस संबंध में अपना अभिमत चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) को भेज दिया है। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह पहले भी इसी मुद्दे पर ऐसी अनुमति देने से इनकार कर चुका है।
दरअसल, डीएमई कार्यालय ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी से इस मामले में परीक्षण कर स्पष्ट अभिमत मांगा था। निजी विश्वविद्यालयों में हेल्थ एंड एलाइड साइंस, मेडिसिन, सर्जरी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, पैरामेडिकल और नर्सिंग जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने की मांग सामने आई थी। इसके लिए विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 6(1) और 6(2) में संशोधन की आवश्यकता बताई गई थी। अब विश्वविद्यालय ने साफ कहा है कि वर्तमान अधिनियम के तहत ऐसा संभव नहीं है।
जानकारी के अनुसार, श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट, रायपुर की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव को पत्र लिखकर निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल कोर्स संचालित करने की अनुमति देने की मांग की गई थी। इसके बाद यह मामला स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और फिर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय तक पहुंचा। डीएमई ने विश्वविद्यालय से तीन दिनों के भीतर स्पष्ट अभिमत मांगा था, जिसका जवाब अब भेज दिया गया है।
निजी विश्वविद्यालयों में मेडिकल शिक्षा शुरू कराने की कोशिश नई नहीं है। पिछले चार वर्षों से इस विषय पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2023 में भी तत्कालीन कुलपति डॉ. ए.के. चंद्राकर और तत्कालीन डीएमई डॉ. विष्णु दत्त ने स्पष्ट अभिमत दिया था कि हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी अधिनियम, 2008 में संशोधन नहीं किया जा सकता और निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल एजुकेशन कोर्स चलाने की अनुमति देना संभव नहीं है।
करीब साढ़े तीन वर्ष पहले एक निजी विश्वविद्यालय ने बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) कोर्स की काउंसलिंग स्वयं कराने की अनुमति मांगी थी। उस समय भी हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने एनओसी देने से इनकार कर दिया था। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया था कि बीपीटी कोर्स का एफिलिएशन वही देगा और काउंसलिंग चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से ही होगी।
हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. दिनेश सिन्हा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने डीएमई को भेजे गए अभिमत में स्पष्ट किया है कि निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल एजुकेशन कोर्स संचालित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड ने 20 मार्च 2023 की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2008 में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जाएगा।
विश्वविद्यालय का अभिमत सामने आने के बाद अब यह मामला राज्य सरकार के स्तर पर पहुंच गया है। यदि निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति देनी है तो इसके लिए अधिनियम में संशोधन करना होगा। ऐसे में अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले निर्णय पर टिकी है।
Updated on:
08 Aug 2026 11:35 am
Published on:
08 Aug 2026 08:52 am
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