
ईश्वर को मिला 'न्याय', धान के बदले लगाया केला, लागत से छह गुना लाभ
पारंपरिक खेती धान के बदले उद्यानिकी फसल से किसानों को लाभ हो रहा है। छत्तीसगढ़ में आज किसानों को फसल विविधिकरण के माध्यम से अच्छा दाम मिल रहा है। इससे किसान नकद एवं व्यावसायिक कृषि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने में राजीव गांधी किसान न्याय योजना भी बड़ी सहायक बनी है।
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विकासखंड बरमकेला के ग्राम बनवासपाली निवासी ईश्वर सिदार के पास 6 हेक्टेयर सिंचित रकबा है। इसमें वह धान की फसल लेते थे। उनको कृषि विभाग ने खरीफ वर्ष 2021-22 में राजीव गांधी किसान न्याय योजनान्तर्गत धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का और अन्य फसल (उद्यानिकी फसल) लगाने प्रोत्साहित किया। धान के बदले कोई अन्य फसल लेने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता एवं अन्य लाभ के बारे में जानकारी दी गई। ईश्वर सिदार ने 2 हेक्टेयर में धान के बदले उद्यानिकी फसल की सहमति दी। उन्हें उद्यानिकी विभाग ने केला, ड्रैगनफ्रूट और आम के पौधे दिए। उन्होंने 1.60 हेक्टेयर में केला, 0.280 हेक्टेयर में आम और 0.120 हेक्टेयर में ड्रैगनफ्रूट लगाया।
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कृषक ईश्वर सिदार को धान की तुलना में उद्यानिकी फसल से आय में वृद्धि हुई। उन्हें उद्यानिकी फसल लगाने में प्रथम वर्ष काश्त लागत 1 लाख से 2 लाख रुपए तक आई। उन्होंने मात्र केला फसल बेचकर ही 6-7 लाख रुपए कमा लिए हैं। ईश्वर सिदार योजना से बढ़ी हुई आमदनी से बहुत खुश हैं। उनको हुए फायदे को देखकर अब दूसरे किसानों में भी परिवर्तित फसल को लेकर काफी उत्साह है। कई किसानों ने भी भविष्य में इस योजनान्तर्गत धान के बदले में अन्य फसल को लेने की सहमति जताई है।
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Published on:
12 Apr 2022 11:24 pm
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