
प्रोफेसर राजीव चौधरी और शिक्षिका सुनीता यादव (Photo Patrika)
National Teachers Award 2026: @ ताबीर हुसैन। शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ के दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलेगा। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव चौधरी और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला की शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रपति सम्मानित करेंगे। दोनों ने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के जरिए विद्यार्थियों के समग्र विकास और विपरीत परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखने की मिसाल पेश की है।
प्रो. राजीव चौधरी को यह सम्मान किसी एक उपलब्धि के बजाय शिक्षा के क्षेत्र में उनके बहुआयामी योगदान के लिए मिल रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समग्र विकास पर काम किया। महिला सशक्तीकरण और आत्मरक्षा के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए। दो देशों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में काम करने के साथ यूजीसी के शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों में एक हजार से अधिक व्याख्यान दिए। उनके 12० से अधिक शोध-पत्र और 18 पुस्तकें प्रकाशित हैं। चार शोध परियोजनाएं पूरी करने के अलावा वे 100 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में रिसोर्स पर्सन रह चुके हैं। उन्हें 2019 में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का बेस्ट टीचर एजुकेटर अवार्ड और 2025 में आईआईटीई का जानकी देवी पुरस्कार फॉर बेस्ट टीचर एजुकेटर भी मिल चुका है।
प्राथमिक विद्यालय खिचरी में पदस्थ सुनीता ने नवाचार, साहित्य और तकनीक के जरिए प्राथमिक शिक्षा को रोचक बनाया है। दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और लघु फिल्मों से बच्चों को पढ़ाती हैं। बच्चों और स्वयं के अभिनय वाली फिल्मों से कठिन विषयों को सहज बनाती हैं। वे कमजोर बच्चों को मुख्यधारा से जोडऩे, पोषण के लिए अपने खर्च से दूध उपलब्ध कराने और न्योता भोजन के लिए प्रेरित करने जैसे प्रयास भी करती हैं। एनईपी-2020 पर शोध, आदिवासी बच्चों के समर कैंप में अध्यापन और सामाजिक कार्यों में भी उनकी भागीदारी रही है। उन्हें 2024 में राज्य शिक्षक सम्मान और 2025 में पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण मिल चुका है।
सुनीता यादव ने कठिन विषयों को बच्चों तक आसानी से पहुंचाने के लिए शैक्षणिक लघु फिल्में तैयार कीं। इनमें बच्चों के साथ उन्होंने खुद भी अभिनय किया। कहानी और अभिनय के माध्यम से विषयों को समझाने की कोशिश की गई, ताकि बच्चे केवल किताब पढ़ने के बजाय उसे देखकर और सुनकर भी समझ सकें। उनकी शिक्षण पद्धति में साहित्य और तकनीक का बेहतर संयोजन देखने को मिलता है। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को बच्चों के लिए अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास किया।
Updated on:
05 Sept 2026 12:29 pm
Published on:
05 Sept 2026 12:29 pm
