
बालार्जुन की ताम्रपट्टिकाओं पर घिरे मंत्री (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Assembly News: विधानसभा मानसून सत्र में गुरुवार को संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल बालार्जुन की ताम्रपट्टिकाओं को लेकर घिर गए। वे कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह के सवाल का जवाब नहीं दे सकें। विपक्ष का कहना था कि प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम में बालार्जुन की तामप्रट्टिकाओं को लेकर अलग भाषा की जानकारी दी गई, जबकि मंत्री अपने जवाब में अलग भाषा की जानकारी दे रहे हैं।
मंत्री के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। हालांकि विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गलत जवाब देने वाले अधिकारी बख्शे नहीं जाएंगे। प्रश्नकाल में विधायक सिंह ने पूछा कि क्या ताम्रपत्र पाण्डुलिपि की श्रेणी आता है।
इस पर मंत्री ने बताया कि ताम्रपत्र पाण्डुलिपि की श्रेणी में नहीं आता था, लेकिन मल्हार का जो ताम्रपत्र है वो सबसे पहले 1987 में जुनवानी में कृषकों को प्राप्त हुआ था। जिसे डॉ. अहमद हसन खान से कृषकों से प्राप्त कर 18 जनवरी 1988 को राष्ट्रपति पुरस्कार से प्राप्त शिक्षक मल्हार निवासी रघुनंदन प्रसाद पाण्डेय को दिया। उस समय यह पाण्डुलिपि की श्रेणी में नहीं आए था, लेकिन बाद में अभी इसको केंद्र सरकार ने पाण्डुलिपि के रूप में स्वीकार किया है। इसका हमारे प्रधानमंत्री ने भी मन की बात कार्यक्रम में जिक्र किया था।
विधायक सिंह ने कहा कि आप ने अपने जवाब में बताया है कि 1987 में इसकी खोज हुई। इसकी लिपि ब्राह्मी और भाषा संस्कृत है। अपने प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में इसकी खोज हुई। यह ताम्रपत्र ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखा गया है। प्रधानमंत्री ने लिपि ब्राह्मी और भाषा संस्कृत बता रहे हैं। इस बारे में विभाग गलत कह रहा है या फिर वहां गलत जानकारी दी गई है। यह संवेदनशील विषय है।
प्रधानमंत्री के द्वारा जो कहा गया है विभाग उससे अलग कैसे जानकारी दे रहा है। इस पर मंत्री ने कहा कि इसके बार में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। जानकारी मंगाकर दे दूंगा। इस पर विधायक ने आपत्ति जताई और कहा कि प्रधानमंत्री देश को जो बात बाते हैं उसे हम सब मानते है और विभाग इसके विपरीत जवाब दे रहा है। सन् और भाषा भी गलत बताई गई है। एआईआर में यह डाक्यूमेंट है। मंत्री ने कहा कि इसका परीक्षण कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने प्रदेश सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। सदन ने इसे स्वीकार कर लिया है। अब इस पर 17 जुलाई को चर्चा होगी। चर्चा के प्रश्नकाल के बाद 12 बजे का समय पेश किया गया है। राज्य निर्माण के बाद यह 10 अविश्वास प्रस्ताव पेश होगा। हालांकि अब तक पेश हुए नौ अविश्वास प्रस्ताव में हर बार मौजूदा सरकार ने अपना बहुमत साबित किया है।
Updated on:
17 Jul 2026 08:06 am
Published on:
17 Jul 2026 08:05 am
