5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

उद्योगपति बनने का सपना बैंकों में कैद, दम तोड़ रही मेक इन इंडिया

युवाओं का उद्योगपति बनने का सपना बैंकों में ही दम तोड़ रहा है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Lalit Singh

•

Updated: 6 Aug 2017, 5:41 PM IST

अजय रघुवंशी/रायपुर. केंद्र और राज्य सरकार ने उद्यमी बनने और मेक इन इंडिया के तहत कई योजनाओं की लॉन्चिंग की है, लेकिन हकीकत यह है कि युवाओं का उद्योगपति बनने का सपना बैंकों में ही दम तोड़ रहा है। मेक इन इंडिया, स्टैंडअप, मुद्रा योजना की हकीकत यह है कि कलक्टर और प्रशासन से पास हुए युवाओं के प्रोजेक्ट को बैंकों ने फेल कर दिया है।

राजधानी स्थित जिला व्यापार एवं उद्योग विभाग में युवाओं ने उद्योग लगाने और स्वावलंबी बनने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना के तहत आवेदन किया, लेकिन बैंकों ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और इंटरव्यू में कमी निकालते हुए प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। राजधानी में बीते वित्तीय वर्ष में ३२९ आवेदन बैंकों को भेजे गए थे,जिसमें सिर्फ ४८ फीसदी प्रकरणों में ही युवाओं को राशि मिल पाई। यह शिकायत भी मिली है कि आवेदनों की मंजूरी के समय बैंकों में युवाओं को इंटरव्यू लेकर फेल किया जा रहा है। इस पर बैंक प्रबंधन ने सरकारी अफसरों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि वे युवाओं को ट्रेनिंग नहीं दे रहे हैं।

Read more: जमीन लेने की सोच रहे हैं तो ऐसे गिरोह से रहिए सावधान! लगाया है करोड़ों का चूना

जब बजट आता है तब मिलता है अप्रूवल
लंबित आवेदनों पर बैंक प्रबंधन का कहना है कि उद्योग और व्यापार संबंधित योजनाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से बजट मिलता है। यह सही नहीं है कि बैंक जानबूझकर आवेदनों को पेंडिंग रखते हैं। हमें समय पर बजट ही नहीं मिलता है, जिससे लंबित प्रकरणों की संख्या बढ़ती जाती है।

मैंने बैंकों को लिखी है चिठ्ठी
कलक्टर ओपी चौधरी ने कहा है कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना के अंतर्गत सभी पेंडिंग मामलों की नियमानुसार स्वीकृति के लिए मैंने बैंकों को चिठ्ठी लिखी है।

Read more: सोशल मीडिया में वायरल की ऐसी गंदी पोस्ट, बलौदाबाजार सहायक जेल अधीक्षक निलंबित

बैंकों ने कहा- युवाओं को देनी चाहिए ट्रेनिंग

इस मामले में जब भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बैंक प्रबंधन इंटरव्यू में फेल नहीं करता, बल्कि जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की जिम्मेदारी बनती है कि वे पहले युवाओं की काउंसिलिंग करें साथ ही ट्रेनिंग देने का भी नियम है। इसके बाद बैंक प्रबंधन युवाओं से कुछ
सवाल करते हैं।

इनका कहना है-

मुझे बैंकों में लंबित प्रकरणों की जानकारी है। मैंने सभी बैंकों को निर्देशित किया है कि वे ३० अगस्त तक उद्योग, व्यवसाय और मेक इन इंडिया के तहत सभी आवेदनों पर विचार करें।
ओपी चौधरी, कलक्टर, रायपुर.

बैंकों ने सभी पात्र प्रकरणों को स्वीकृत किया है। कई बार बजट की समस्या होती है, जिसकी वजह से थोड़ी लेटलतीफी हो जाती है। बजट मिलते ही पेडिंग मामलों से निपटारे के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिया जाएगा।
ब्रम्ह सिंह, डीजीएम, भारतीय स्टेट बैंक