
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (photo Patrika)
Swami Avimukteshwaranand : देश में गौ संरक्षण, गौ रक्षा और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग पर बहस तेज हो गई है। इसी विषय पर बेमेतरा पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बेबाक राय रखी। उन्होंने गौ संरक्षण के गिरते आंकड़ों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली और सामाजिक जिम्मेदारियों पर खुलकर पत्रिका से बातचीत की।
प्रश्न 1: पूर्व में महर्षि दधीचि द्वारा गौ रक्षा हेतु अस्थियों के दान का उल्लेख मिलता है, वर्तमान में आप इस प्रेरणा को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर: आज भी लोग गौ माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे रहे हैं। हमने ऐसे 9000 बलिदानियों की सूची तैयार की है। गौ भक्त रात-रात भर जागकर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। झूठे मुकदमों और प्रताड़ना के बावजूद वे डिगे नहीं हैं। महर्षि दधीचि का त्याग ही उनकी प्रेरणा का मुख्य स्रोत है।
उत्तर: स्थिति बेहद चिंताजनक है। उत्तर प्रदेश की 2019 से 2025 के बीच 5 साल की पशु गणना में लगभग 70 लाख गायें गायब पाई गई हैं। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि इतनी गायें कहां गईं? अंग्रेजों के समय से गाय को कागजों में पशु कहा जा रहा है और सरकारें उसी रास्ते पर हैं। जब सब कुछ हिंदू के नाम पर है, तब भी गायें गायब होना हिंदुत्व के नाम पर ढोंग और पाखंड को दर्शाता है।
उत्तर: सबसे बड़ी बाधा सरकारें ही हैं। सनातन धर्म के साथ-साथ देश का मुस्लिम और ईसाई समुदाय भी गाय को राष्ट्रमाता बनाने के पक्ष में है। जब आम जनता तैयार है, तो रुकावट वे राजनीतिक हिंदू हैं जो केवल ढोल बजाते हैं। सत्ताधारी भाजपा के पास 22 राज्यों में सरकारें हैं। वे चाहें तो एक दिन में इसे राज्यमाता घोषित कर सकते हैं, जिसके बाद केंद्र में भी कानून बनने में देर नहीं लगेगी।
उत्तर: सबसे पहली जिम्मेदारी यह है कि सरकारी कागजातों और जनसामान्य की भाषा में सुधार करके गाय को 'पशु' कहना बंद किया जाए और माता का दर्जा दिया जाए। जब तक गाय को पशु कहेंगे, व्यवहार भी वैसा ही होगा। माता कहने से ही समाज और आने वाली पीढ़ियों का दृष्टिकोण बदलेगा।
उत्तर: इसके तीन प्रमुख आधार हैं। गाय को माता मानने से समाज में संवेदनशीलता और पवित्रता पुनः जागृत होगी। गौ माता के साथ सदियों पुराना अटूट रिश्ता मजबूत होगा। प्राचीन भारत इसी के बल पर सोने की चिड़िया बना था। गौ-आधारित अर्थतंत्र लागू होने से देश समृद्ध होकर पुनः सोने की चिड़िया और विश्वगुरु बनेगा।
पुणे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति पर दिए गए विवादित बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे उनकी अज्ञानता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राहुल बिना शास्त्रों की समझ के सलाहकारों के कहने पर बोल रहे हैं, जबकि मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात कही गई है।
शंकराचार्य ने कहा कि जैसे भाजपा हर बात पर नेहरू का नाम लेती है, वैसे ही कांग्रेस अपनी कमियां छिपाने के लिए मनुस्मृति पर दोष मढ़ती है। 50 से अधिक वर्षों के शासन और आजादी के 78 साल बाद भी यदि समाज में असमानता, अपराध और भेदभाव कायम हैं, तो नेताओं को अपनी नाकामियों पर ध्यान देना चाहिए न कि धर्मग्रंथों पर। उन्होंने चेतावनी दी कि नासमझी भरी बयानबाजी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं, अतः संभलकर बोलें।
Updated on:
02 Sept 2026 09:17 am
Published on:
02 Sept 2026 09:17 am
