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उजड़ गया नकटी गांव, जिन घरों में बसी थीं यादें वे अब मलबे में तब्दील, 80 घरों में चला बुलडोजर

Nakti Village Demolition: नकटी गांव में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई के तहत 80 घरों पर बुलडोजर चलाया गया। जिन घरों में वर्षों से लोगों की यादें बसी थीं
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रायपुर

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Love Sonkar

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ताबीर हुसैन

Jun 30, 2026

Women grieving amidst construction debris

नकटी गांव में घर टूटने के बाद रोती महिला (Photo Patrika)

Nakti village: आज के दौर में घर बनाना किसी यज्ञ से कम नहीं। घर बनाने में पैसे तो लगते हैं, उससे कहीं ज्यादा भावनाएं जुड़ जाती हैं। जब आपकी आंखों के सामने वही आशियाना ढहता दिखाई दे जिसे आपने कितनी तसल्ली से बनवाया हो तो सोचो क्या गुजरेगी। राजधानी से लगे नकटी गांव में ऐसा ही हृदय विदारक नजारा देखा गया। अवैध कब्जे की जमीन में बने घरों को ढहाने के लिए प्रशासन ने नोटिस जारी कर दिया था। इसके बाद ग्रामीणों की नींद उड़ गई थी। मकान टूटने के डर से वे दो रात सो नहीं पाए और जब सबकुछ खत्म हो गया तो उनके आंखों से आंसू सूख गए। आंखें मानों पथरा गईं।

बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पाबंदी

कार्रवाई से पहले और बाद तक प्रशासन ने गांव में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। बाकायदा बैरिकेड लगाया गया ताकि न तो कोई बाहर से आए और न गांव से कोई जाए। हालांकि उस रास्ते से गुजरने वालों को परेशानी हुई। गांव से तीन किमी दूर से पुलिस का पहरा लगा दिया गया था।

धक्का-मुक्की और पथराव

ग्रामीणों ने बताया कि गांव को छावनी में बदल दिया गया था। रात से ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। सूर्योदय के साथ ही बुलडोजर के पहिए गांव के कच्चे-पक्के मकानों को बेदर्दी से रौंदने लगे। हालांकि ग्रामीण घर के सामने खड़े हो गए। कहने लगे कि पहले हम पर बुलडोजर चलाओ, फिर हमारी लाश के ऊपर से घरों की दीवार तक पहुंचो। चूंकि पुलिस ने पहले ही इस चुनौती की तैयारी कर चुकी थी, लिहाजा वह ग्रामीणों को खींचकर हटाती गई और बुलडोजर अपना काम करता चला गया।

नगर निगम के वाहन से सामानों की शिफ्टिंग

मौके पर नगर निगम की कुछ मालवाहक गाडिय़ां भी मौजूद थीं जो पीडि़तों के सामानों की शिफ्टिंग कर रही थी। मौका स्थल से नवा रायपुर स्थित सेक्टर 30 में सामान शिफ्ट किया जा रहा था। कई ग्रामीणों ने घर के ब्यारा में गाय-भैंस भी बांध रखी थी जिसे पुलिस खुद खोलकर बाहर ले आई।

दर्द और पीड़ा के यह शब्द

ग्रामीणों ने रूंधे गले से प्रशासन से गुहार लगाई कि हमें बेघर मत करो। लेकिन घर को टूटता देख उनके सब्र का बांध टूट गया। उनका कहना था कि हम सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उन्होंने कहा था कि 4 महीने तक कुछ नहीं होगा लेकिन 4 महीने तो दूर 4 दिन भी प्रशासन ने इंतजार नहीं किया और हमें बेघर कर दिया। कुछ ग्रामीणों कहा कि सरकार हमें एक फ्लैट दे रही लेकिन परिवार बड़ा है। इतने लोग एक साथ भला छोटे से फ्लैट में कैसे रहेंगे।

जब आक्रोश पथराव में बदला

प्रशासन की सख्ती के बीच एक दौर ऐसा भी आया जब ग्रामीण आक्रोशित हो गए और वे पुलिस बल पथराव करने लगे। हालांकि पुलिस बल कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की बल्कि खुद को हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर से बचाते रहे।

सूची में नाम नहीं लेकिन गिरा दिया घर

उन्हीं मकानों को ढहाया जाना था जिनके नाम सूची में थे। उनके घरों में नोटिस भी चस्पा की गई थी। वाट्सऐप पर मैसेज भी भेजे गए थे। इस बीच टिकेश्वरी नामक युवती का मकान भी ढहा दिया गया, जो लिस्ट में शामिल नहीं था। प्रशासन ने उसे आश्वासन दिया कि उन्हें भी फ्लैट दिया जाएगा।

थाने में बिठाया गया

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण आपत्ति दर्ज कराते रहे। इस दौरान उन लोगों को मौके से उठा लिया गया जो कार्रवाई में बाधा बन रहे थे। उन्हें अस्थाई तौर पर जेल बनाकर रखा गया। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

समझाइश का दौर

कार्रवाई के बाद ग्रामीण रोते-बिलखते प्रशासनिक अधिकारियों से भिड़ गए थे। उनसे सवाल-जवाब करने लगे। इस बीच अधिकारी हैंड लाउडस्पीकर के जरिए शांति बनाए रखने की अपील करता रहा। अधिकारी लगातार समझाते रहे कि हम जो भी कर रहे हैं कानून को ध्यान में रखते हुए कर रहे। आप लोगों की पीड़ा हम समझ रहे हैं लेकिन कार्रवाई जरूरी थी। आप लोगों ने पुलिस बल पर पथराव किया, बावजूद हम आपको समझाते रहे।

कहां जाएंगे, रात यहीं काटेंगे

नकटी के उजाड़ होने के बाद कई ग्रामीण अपने घर के पास बैठे थे। उनकी आंखों से आंसू सूख चुके थे। जब उनसे पूछा गया कि आज रात कहां रहेंगे तो वे कहने लगे कि कहां जाएंगे, रात यहीं काटेंगे। अभी बहुत सा सामान है जिसे समेटना है।

पानी और मुर्रा से मदद

कार्रवाई के दौरान महिलाओं का एक समूह मुर्रा और पानी बांटता दिखाई दिया। उनकी गाड़ी में समाज कल्याण विभाग लिखा हुआ था। पूछने पर बताया कि यहां की कुछ महिलाएं हमारे साथ काम करती हैं। इसलिए हम उनका दर्द बांटने आए हैं।

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