22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

“बयानबाजी से सच नहीं बदलता”.. झीरम कांड पर कांग्रेस के आरोपों का CM साय ने दिया जवाब

NIA Investigation: झीरम कांड के NIA कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस के सवालों का CM विष्णु देव साय ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सबूत थे तो जांच एजेंसी के सामने रखने चाहिए थे, बयानबाजी से सच नहीं बदलेगा।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Shradha Jaiswal

•

Updated: 7 Sep 2026, 1:16 PM IST

Jhiram Ghati Case

Jhiram Ghati Case: "बयानबाजी से सच नहीं बदलता"(photo-patrika)

Jhiram Ghati Case: छत्तीसगढ़ के झीरम कांड मामले में NIA न्यायालय के हालिया फैसले के बाद सियासत गरमा गई है। कांग्रेस की ओर से फैसले और जांच पर उठाए जा रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस नेताओं के पास मामले से जुड़े कोई तथ्य, प्रमाण या सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने रखना चाहिए था। साय ने कहा कि करीब 13 साल चली जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत का फैसला आया है। अब बयानबाजी करने से सच नहीं बदलेगा।

Jhiram Ghati Massacre: 13 साल तक चली जांच और न्यायिक प्रक्रिया

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झीरम कांड मामले की जांच NIA को उस समय सौंपी गई थी, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। इसके बाद करीब 13 वर्षों तक मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। इस दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। साय ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के बाद अब न्यायालय का फैसला सामने आया है। न्यायालय ने 10 लोगों को दोषी ठहराया है, जबकि 16 सितंबर को दोषियों की सजा का निर्धारण किया जाएगा।

‘सबूत थे तो NIA के सामने क्यों नहीं रखे?’

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि NIA देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक है और जब झीरम कांड की जांच उसके पास गई, उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में यदि कांग्रेस नेताओं के पास कोई महत्वपूर्ण तथ्य या प्रमाण था, तो उन्हें जांच एजेंसी को उपलब्ध कराना चाहिए था।उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी करना केवल सवालों से बचने का प्रयास है। आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए तथ्य और साक्ष्य जरूरी होते हैं।

भूपेश बघेल के पुराने बयान पर भी निशाना

मुख्यमंत्री साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुराने बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब बघेल विपक्ष में थे, तब वे कहा करते थे कि उनके पास झीरम कांड से जुड़े सबूत ‘जेब में’ हैं। साय ने कहा कि यदि वास्तव में उनके पास मामले से जुड़े सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने रखना चाहिए था। उन्होंने दोहराया कि केवल आरोप लगाने से किसी मामले में तथ्य साबित नहीं होते, बल्कि उसके लिए ठोस प्रमाण आवश्यक होते हैं।

‘जहां जाते हैं, वहां गुटबाजी शुरू हो जाती है’

कांग्रेस में प्रभारियों के फेरबदल को लेकर भी मुख्यमंत्री साय ने पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रही है। साय ने कहा कि जहां कांग्रेस जाती है, वहां गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है। उनके अनुसार, जनता से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के बजाय कांग्रेस नेता अपने ही दल के भीतर राजनीतिक संघर्ष में उलझे रहते हैं।

भूपेश बघेल के प्रभार बदलाव पर कटाक्ष

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभार में हुए बदलाव को लेकर भी साय ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जब बघेल को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी उनके विरोध की बात सामने आई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शायद उसी का नतीजा है कि अब उनका प्रभार प्रदेश बदल दिया गया है। इस बयान के जरिए उन्होंने कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक गतिविधियों और गुटबाजी को लेकर पार्टी पर निशाना साधा।