
रायपुर की शिक्षक रीता अभनपुर के लूनेश (Photo Patrika)
Innovative Teachers of Chhattisgarh: पढ़ाने का वही पुराना तरीका हो तो सीखना भी सीमित रह जाता है, लेकिन जब शिक्षक प्रयोग करने लगे तो कक्षा बच्चों के लिए खोज और अनुभव का मंच बन जाती है। राज्यपाल शिक्षक सम्मान के लिए चयनित पीजी उमाठे उत्कृष्ट विद्यालय, शांति नगर, रायपुर की शिक्षिका रीता मंडल और आशाराम डहरिया शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छछानपैरी अभनपुर के व्याख्याता लूनेश कुमार वर्मा ने शिक्षा में नवाचार को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया। रीता ने गणित को कहानियों, मॉडल और डिजिटल तकनीक से आसान बनाया, वहीं हिंदी के व्याख्याता डॉ. वर्मा ने गतिविधि आधारित शिक्षण के साथ हिंदी-संस्कृत के बीच ऐसा सेतु बनाया कि वे धाराप्रवाह संस्कृत बोलने में भी सक्षम हैं। दोनों के प्रयोगों का असर कक्षा से बाहर भी दिखाई देता है।
रीता मंडल ने गणित को बच्चों के लिए सरल और रोचक बनाने के लिए 200 से अधिक टीएलएम तैयार किए हैं। ‘गणकहानियां’ में गणित की 40 अवधारणाओं को कहानी के रूप में प्रस्तुत कर पॉडकास्ट और वीडियो के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचाया। जियो-जिब्रा समेत डिजिटल टूल्स, गणित क्लब, मॉडल और गतिविधियों के माध्यम से वे बच्चों को सीखने का अवसर देती हैं। उनके मार्गदर्शन में दो विद्यार्थियों ने ब्रिक्स-2026 में आईआईटी तिरुपति में जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी आधारित प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। विद्यालय के आठ विद्यार्थी एनएमएमएसई में चयनित हो चुके हैं। वे पीएलसी, एससीईआरटी और डायट के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण में भी योगदान दे रही हैं। राष्ट्रीय जीरो इनोवेशन अवॉर्ड और मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण उनके नवाचारों को मिल चुका सम्मान है।
हिंदी व्याख्याता लूनेश कुमार वर्मा का नवाचार बहुभाषी शिक्षण और गतिविधि आधारित शिक्षा में दिखाई देता है। हिंदी के शिक्षक होते हुए भी वे धाराप्रवाह संस्कृत बोलने में समर्थ हैं। उन्होंने उदय प्रकाश की ‘मोहनदास’ और ‘तिरिछ’ कहानियों का संस्कृत अनुवाद किया, जिससे आधुनिक हिंदी साहित्य को संस्कृत से जोडऩे का प्रयोग सामने आया। कक्षा में वे विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने के लिए विविध गतिविधियों का इस्तेमाल करते हैं।
पिछले 15 वर्षों से एससीईआरटी और डायट में शिक्षक प्रशिक्षण, मल्टीमीडिया वीडियो निर्माण तथा विभिन्न कार्यशालाओं-प्रशिक्षणों में लगातार सहभागिता कर रहे हैं। विद्यालय के बच्चों की सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया। मानवता की सेवा के लिए वे 25 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। उनके तीन कविता संग्रह, हाइकु संग्रह और 85 से अधिक शोधपरक आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
Updated on:
7 Sep 2026, 1:28 PM IST
Published on:
7 Sep 2026, 1:28 PM IST
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