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रायपुर में मानसून का साइड इफेक्ट! सर्दी-खांसी से लेकर फूड पॉइजनिंग तक… हर तीसरा मरीज वायरल की चपेट में

Chhattisgarh Health Update: बारिश और मौसम में बदलाव के बीच छत्तीसगढ़ में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। उल्टी-दस्त, वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और फूड पॉइजनिंग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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रायपुर

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Laxmi Vishwakarma

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Updated: 28 Jul 2026, 7:56 AM IST

Monsoon Diseases

सर्दी-खांसी व फूड पॉइजनिंग के केस बढ़े (photo source- AI )

Monsoon side effects: इन दिनों ज्यादातर घरों में लोग मौसमी बीमारी से जूझ रहे हैं। लोग उल्टी-दस्त से पस्त हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में कुछ मरीजों की मौत भी हुई है। एम्स, आंबेडकर, जिला समेत निजी अस्पतालों में सर्दी, खांसी, बुखार, फंगल इंफेक्शन, फूड पाइजनिंग व सांस में तकलीफ के मरीजों की संख्या भी अच्छी खासी बढ़ गई है। पिछले एक माह में उल्टी-दस्त के 1000 से ज्यादा मरीज आए हैं।

Viral Fever Chhattisgarh: मौसम में उतार-चढ़ाव से वायरल इंफेक्शन

डॉक्टरों के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या 30 से 35 फीसदी पहुंच गई है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम में उतार-चढ़ाव से वायरल इंफेक्शन के मामले बढ़े हैं। ज्यादातर घरों में एक सदस्य से दूसरे तथा कई परिवारों में सभी लोग बारी-बारी से बीमार पड़ रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन, चेस्ट व पीडियाट्रिक विभाग में 600 में 200 सीजनल बीमारी से पीडि़त मरीजों का इलाज हो रहा है। पेट में इंफेक्शन के अलावा सिरदर्द, बदन दर्द के केस भी काफी बढ़े हैं। मरीजों में बुखार 3 से 7 दिनों तक बना रहता है।

सर्दी या फ्लू के बाद चेस्ट में इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है। यही नहीं सांस नली में सूजन भी आ सकती है। इससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। पिछले 15 दिनों से ओपीडी में ऐसे केस बढ़े हैं। चेस्ट इंफेक्शन विभिन्न वायरस व बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। जैसा कि इन्फ्लूएंजा वायरस, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस आदि। अपनी मर्जी या केमिस्ट की सलाह से दवा न खाएं -डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन नेहरू, मेडिकल कॉलेज

Rainy Season Health Tips: नमी, गंदगी व तापमान में उतार-चढ़ाव कारण

बारिश के बाद गड्ढों में जमा पानी से मच्छर बढ़े हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव से वायरल संक्रमण तेज हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार नमी व गंदगी से फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के मामले बढ़ रहे हैं। दूषित पानी और भोजन से पेट की बीमारियां फैल रही हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे रोग के लक्षण दिखते ही अस्पताल में इलाज करवाएं। घर पर खुद से या केमिस्ट से दवा लेकर इलाज न करें। घर के आसपास पानी-गंदगी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। पानी उबाल कर पीना जरूरी है। बासी भोजन से बचें और हल्का-सुपाच्य भोजन लें। जरूरत होने पर डॉक्टर से सलाह लें।