
मां - बाप ने मांगी बेटी की मौत की दुआ, बोला - अब किसी काम की है ये लड़की, मर जाए तो अच्छा
संजीव शर्मा@रायगढ़. "बाप बड़ा न भईया, सबसे बड़ा रुपैया" - इसे चरितार्थ होते लैलूंगा थाना क्षेत्र के एक गांव में देखा जा सकता है। मानव तस्करी की शिकार एक बेटी जब रुपए कमाने में अक्षम हो गई तो उसके माता-पिता उसकी मौत की दुआ करने लगे। गांव के कुछ जागरूक लोगों की सूचना पर बीमारी से जूझ रही पीडि़ता को लेने जब स्वास्थ्य अमला पहुंचा तो माता-पिता ने यह कहते हुए लौटा दिया कि अब यह किस काम की है, मर जाती है तो अच्छा होता, परेशानियों से मुक्ति तो मिलती...। हालांकि, स्वास्थ्य अमले की काफी समझाइश के बाद पीडि़ता को अस्पताल पहुंचाने के लिए माता-पिता राजी हुए।
लैलूंगा गांव की एक नाबालिग को वर्ष 2015 में प्रदीप उरांव बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गया। प्रदीप ने दिल्ली में किसी के यहां किशोरी को घरेलू कार्य के लिए लगा दिया। लेकिन, कुछ दिन बाद किशोरी जैसे-तैसे भागकर घर लौट आई। आर्थिक परेशानियों का दंश झेल रहे परिवार को समझा-बुझाकर प्रदीप वर्ष 2017 में फिर किशोरी को दिल्ली ले जाने में सफल हो गया। प्रदीप ने दिल्ली में फिर से उसे किसी के घर पर काम में लगा दिया। यहां पर मालिक ने एक दिन किशोरी के शारीरिक शोषण का प्रयास किया। इज्जत बचाने के लिए किशोरी भागते हुए 5 वीं मंजिल पर पहुंच गई, जहां से पैर फिसला और वह नीचे गिर गई।
किशोरी के रीढ़ की हड्डी समेत कई हड्डियां फ्रैक्चर हो गईं। प्रदीप ने किशोरी की मां को सूचना देकर दिल्ली बुलाया। कुछ दिनों तक उपचार कराने के बाद प्रदीप ने मार्च 2017 में पीडि़ता और उसकी मां को लैलूंगा भेज दिया। यहां पर परिजनों ने किशोरी का इलाज कराना भी उचित नहीं समझा। किशोरी एक चारपाई पर पड़ी हुई है, जिसके पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया है और जहां-तहां से मवाद आने लगा है।
गांव के लोगों ने रायपुर स्थित महिला हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर पर कॉल कर मामले की सूचना दी। संरक्षण अधिकारी ने चाइल्ड लाइन, बाल कल्याण समिति से चर्चा कर किशोरी के गांव में एक टीम भेजी, ताकि बच्ची का इलाज कराया जा सके। लेकिन, परिजन इलाज कराने के पक्ष में नहीं थे। बार-बार वो यह कह रहे थे कि अब यह किस काम की है, मर जाती है अच्छा होता, परेशानियों से मुक्ति तो मिलती..। घंटों समझाइश के बाद बीमार बेटी को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने सहमति दी।
रायगढ़ के जिला बाल संरक्षण अधिकारी दीपक डनसेना ने बताया कि महिला हेल्पलाइन से सूचना पर किशोरी के गांव में संजीवनी-108 को भेजा गया था। इलाज नहीं कराने की बात कह परिजनों ने संजीवनी को लौटा दिया। इसके बाद फिर एक टीम उसके गांव पहुंची और परिजनों को समझाइश दी। इससे बात बनी। किशोरी की हालत में सुधार हो रहा है।
Updated on:
3 Aug 2018, 11:46 AM IST
Published on:
3 Aug 2018, 11:37 AM IST
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