
छत्तीसगढ़ में मानसून लेट (photo source- Patrika)
Monsoon Update: छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के बावजूद लोगों को अब भी झमाझम बारिश का इंतजार है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गुरुवार को भीषण उमस और तेज गर्मी का असर देखने को मिला। बादलों की आवाजाही के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि 27 जून के बाद प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। इसके साथ ही अगले सात दिनों तक कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी भी जारी की गई है।
प्रदेश की राजधानी रायपुर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.7 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं होने से लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। आर्द्रता का स्तर 66 प्रतिशत तक पहुंचने से वातावरण और अधिक चिपचिपा महसूस हुआ।
दूसरी ओर बिलासपुर प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा। यहां अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.3 डिग्री अधिक है। दुर्ग में पारा 39.2 डिग्री और राजनांदगांव में 39 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं पेंड्रारोड प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अंबिकापुर में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री और जगदलपुर में 32.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के केवल एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। कुसमी और बस्तर में तीन सेंटीमीटर बारिश हुई, जबकि बकावंड, बलरामपुर और गीदम में दो सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। दौरा कोचली और करपावंड में एक सेंटीमीटर बारिश हुई। इसके अलावा कई स्थानों पर मेघगर्जन और वज्रपात की घटनाएं भी दर्ज की गईं। हालांकि अधिकांश जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से गर्मी का असर बरकरार रहा।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति धीमी है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। उत्तर राजस्थान से बिहार तक मौसमी द्रोणिका सक्रिय है, जबकि मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है। इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 27 जून के बाद बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों में भी आगे बढ़ जाएगा। इसके बाद कई जिलों में मध्यम से तेज बारिश दर्ज की जा सकती है।
मानसून की औपचारिक दस्तक के बावजूद पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खरीफ फसलों की बुआई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन कई क्षेत्रों में खेत अभी भी पर्याप्त नमी का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो बुआई का कार्य तेजी से शुरू हो सकेगा। हालांकि बारिश में अधिक देरी होने पर खेती की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले सात दिनों तक गरज-चमक, तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की अपील की है। किसानों और ग्रामीणों को भी मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून अब सक्रिय होने की स्थिति में है। यदि मौजूदा मौसम प्रणालियां मजबूत बनी रहती हैं तो अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। तब तक लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ में मानसून के देर से सक्रिय होने का मुख्य कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी प्रगति, बंगाल की खाड़ी में समय पर मजबूत निम्न दबाव तंत्र (लो प्रेशर सिस्टम) का नहीं बनना और मानसूनी द्रोणिका का प्रदेश के अनुकूल स्थिति में सक्रिय नहीं होना रहा। इसके कारण पर्याप्त नमी नहीं पहुंच सकी और व्यापक बारिश नहीं हुई। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार अब परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं, जिससे प्रदेश में जल्द ही मानसून के रफ्तार पकड़ने और अच्छी बारिश होने की संभावना है।
Published on:
27 Jun 2026 09:08 am
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