
Swine Flu: छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, यह चिंताजनक है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में हर्ड इम्युनिटी बन गई है। ऐसे में यह बीमारी उन्हीं लोगों को होगी, जिन्हें नहीं हुई थी। मरीजों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन मौतें कम होंगी। शरीर में एच1एन1 वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनने के कारण मरीज गंभीर नहीं होंगे। जिन्हें फेफड़े, हार्ट, कैंसर, लीवर व किडनी की गंभीर बीमारी है, उनके लिए स्वाइन फ्लू ज्यादा खतरनाक है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। एहतियात के लिए सभी लोगों को भीड़ वाले स्थानों पर मास्क जरूर पहनना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कम रहेगा।
प्रदेश में पिछले दो माह में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 100 पार कर गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में यह केवल 22 है। आखिर स्वास्थ्य विभाग आंकड़ों को अपडेट क्यों नहीं कर रहा है, ये सबसे बड़ा सवाल है। प्रदेश में सबसे ज्यादा मरीज बिलासपुर में मिल रहे हैं। रायपुर में मरीजों की संख्या कम है। ये जरूर है कि राजधानी में दूसरे जिलों के मरीजों का इलाज सरकारी व निजी अस्पतालों में चल रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार बिलासपुर, धमतरी, दुर्ग व रायगढ़ इलाके के काफी मरीजों ने स्वाइन फ्लू का इलाज करवाया है। इसमें कुछ मरीज वेंटीलेटर पर रहने के बावजूद स्वस्थ होकर गए हैं। खास बात ये है कि लोग सर्दी, खांसी व वायरल फीवर को हल्के में लेकर देरी से इलाज कर रहे हैं। इससे केस बिगड़ रहे हैं। ऐसे ही लोगाें की मौत स्वाइन फ्लू से हो रही है। आंबेडकर अस्पताल के चेस्ट विभाग में उन्हीें मरीजों को भेजा जा रहा है, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इसके पहले उनका इलाज मेडिसिन विभाग में हो रहा है।
संदिग्ध मरीजों के लिए अलग ओपीडी, आइसोलेशन में इलाजस्वास्थ्य विभाग ने पांच साल पहले कोरोना के लिए जरूरी प्रोटोकाल जारी किया था। इसमें बताया गया है कि स्वाइन फ्लू से मरीजों के लिए अलग ओपीडी जरूरी है। ताकि सामान्य मरीज संक्रमण से बच सके। बीमारी की पुष्टि होने के बाद मरीज काे सीधे आइसोलेशन वार्ड में भेजा जाए। वहां भी इलाज करने वाले डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ जरूरी सावधानी बरतें। इस बीमारी से बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को खतरा ज्यादा है। अस्पताल के लिए बनाई गई गाइडलाइन में पीपीई किट को शामिल किया गया है। इनमें मरीजों के इलाज के दौरान ग्लब्स, हाई इफिसिएंसी या थ्री लेयर सर्जिकल मास्क, लांग गाउन, प्रोटेक्टिव आई वियर, कैप, प्लास्टिक एप्रेन पहनना जरूरी है।
पांच साल पहले जब राजधानी समेत प्रदेश में स्वाइन फ्लू फैला था, तब आंबेडकर अस्पताल में डॉक्टर समेत नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ को वैक्सीन लगाई गई थी। डॉक्टरों के अनुसार वैक्सीन लगने से बीमारी का खतरा कम हो जाता है। अगर कोई संक्रमित भी हुआ तो वह गंभीर नहीं होगा। हल्के लक्षण होंगे और जरूरी इलाज से ठीक हो जाते हैं।
लोगों में स्वाइन फ्लू के लिए हर्ड इम्युनिटी बन गई है। ऐसे में बीमारी के बढ़ने की संभावना तो है, लेकिन ज्यादातर लोग गंभीर नहीं होंगे। जबसे जरूरी ध्यान देने वाली बात ये है कि सर्दी, खांसी व बुखार होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं। बताए अनुसार दवा लें। लापरवाही बिल्कुल न करें।
छत्तीसगाह के राजधानी रायपुर में स्वाइन फ्लू ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक माह में 60 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव के मरीज शामिल हैं। वहीं, 6 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। इनमें 4 की मौत बिलासपुर व दो की राजनांदगांव में हुई है। गुरुवार को बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में मनेंद्रगढ़ निवासी 41 वर्षीय कॉलरीकर्मी की मौत हो गई। यहां पढ़े पूरी खबर…
बिलासपुर जिले में स्वाइन फ्लू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार इसे संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। जबकि इससे अब तक 6 लोगों की मौत भी हो चुकी है। शुक्रवार को भी तीन नए संक्रमित मिले। इसमें दो शहर के तो एक सीपत क्षेत्र का है। तीनों को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है यहां पढ़े पूरी खबर…
Updated on:
30 Aug 2024 02:40 pm
Published on:
30 Aug 2024 11:00 am
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