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बेटे ने हासिल किया ऐसा मुकाम, सब्जी बेचने वाले पिता को भी नहीं हुआ यक़ीन

बचपन में दूरदर्शन का कार्यकरम देखकर उस टाइम सोचा करता ,की कैसे इतने छोटी सी टीवी में सब लोग देखते है।
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रायपुर

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Chandu Nirmalkar

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Updated: 30 Oct 2017, 2:42 PM IST

gautam

आज के डिजिटलाइज युग में सफल वही होता है जो टेक्नॉलजी को अपने वश में रखने की दक्षता रखता हो। एेसा कहना है रायपुर के वीएफएक्स ब्वाय ई गौतम कुमार का। गौतम से हुई बातचीत के कुछ अंश।

वीएफएक्स क्या है यहा कोई जानता भी नहीं एेसे फील्ड मे कैसे आना हुआ?

जब बचपन में दूरर्दशन देखता था तभी से जनना चाहता था कि ये सब कैसे चलता है, इतनी छोटी सी टीवी में ये लोग कैसे आ जाते हैं एंटीना से टीवी कैसे चलती है। 10वी पास करने के बाद र्हाडवेयर का कोर्स करके कंप्यूटर बनाना शुरू किया। इसके साथ ही मल्टीमीडिया का र्कोस किया। जिसमें विडियों से लेकर एनिमेशन तक के सारे सॉप्टवेयर सीखे। फिर रायपुर मे एक टीवी चैनल मे जॉब मिली उसके बाद विडियो एडिटर से टेक्निकल हेड और फिर दोस्तों के साथ मिल कर खुद का ऑफिस और फिर शुरू हुई खुद को स्थापित करने की जंग।

स्ट्रगल टाईम पर कैसे सब कुछ मैनेज करते थे?

खुद को स्टैंड करना बहुत टफ होता है खास कर तब जब इनकम का कोई र्सोस न हो। ऊपर से यहां पर बहुत कम लोगों को वीएफएक्स एनिमेशन के बारे मे पता था। बताने पर रिसपॅासं तो अच्छा मिलता था बट सभी फ्री मे काम करवाना चाहते थे। लेकिन दोस्तों के सपोर्ट ने टूटने नही दिया। लेकिन जब लोगों ने छत्तीसगढी फिल्म डाइरेक्टर सतीश जैन की फिल्म मे सॉग्स और प्रोडक्शन हाउस मोंटाज में वीएफएक्स वर्क देखा उसके बाद तो इंड्रस्टी ही नही कॉरपरेट सेक्टर से भी काम मिलने लगा।

अभी तक की जर्नी में क्या मिला और कैसे मिला?

काम जब बढऩे लगा तब मुझे लगा कि और ज्यादा टेक्निकली साउंड होने की जरूरत है। और फिर हैदराबाद जाकर इंटर मीडिएट (आईडी) का र्कोस किया जिसमे पिक्चर क्वालिटी पर काम कैसे करते हैं सीखा। जिसके बाद मुंबई में एम टीवी रोडीज सीजन फोर्टीन के एपिसोड्स को एडिट करने का काम मिला। उसके साथ ही फिल्म प्रोटेक्शन का काम भी सीखा। जिससे यहां छत्तीसगढ़ी फिल्मों के पायरेसी को रोकने मे मदद मिल सके।

आप किन चीजों को अपना अचीवमेंट मानते हैं?

दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद से ट्रेनिंग लेने के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्म इंड्रस्ट्री में अभी तक नौ से ज्यादा पोस्ट-प्रोडक्शन स्टूडियोज और टेक्निकल सर्पोट दिये हैं 13से ज्यादा न्यूज स्टूडियो का सेटअप किया, 11 से ज्यादा छत्तीसगढ़ी फिल्म प्रोडक्शन हाउसेज मे इक्युपमेंट प्रोवाइड कराया और कई सारे टेक्निकल इंस्टिट्यूशनस मे एज अ गेस्ट फैकेल्टी ट्रेनिंग भी दे रहा हूं

यूथ के लिए क्या मैसेज देना चाहते हैं?

इस फील्ड में आने वाले एक बात जरूर समझ लें कि प्रोफेशनली काम करने के लिए एडुकेशनली और प्रैक्टिकली साउंड होना बहुत जरूरी होता है। जो सस्सेस होने के लिए बहुत जरूरी है सभी के लिए बेस्ट ऑफ लक।