
यूरोप सिंगापुर में चलने वाले सिम्फी सॉफ्टवेयर से पढेंगे अब स्टूडेंट्स
ब्यावरा. स्टूडेंट्स को हाईटेक तरीके से पढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में अनूठी पहल की जा रही है, यहां अब यूरोप और सिंगापुर में चलने वाले सिम्फी सॉफ्टवेयर के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाएगा, अच्छी बात यह है कि इस तरीके से पढ़ाने से बच्चों को जल्दी समझ में आएगा और उन्हें जब एक वीडियो गेम की तरह स्क्रीन पर पढ़ाया जाएगा तो उनकी भी रूचि पढऩे में बढेंगी, ये शुरुआत खुद कलेक्टर द्वारा की जा रही है।
नए शैक्षणिक सत्र में जिला प्रशासन नवाचार करने जा रहा है। इसके माध्यम से यूरोप, सिंगापुर सहित अन्य विदेशी पैटर्न पर वर्चुअल पढ़ाई करवाई जाएगी। जिसमें चित्र के माध्यम से आसानी से समझ में आने वाली चीजें सरकारी स्कूल के बच्चों को पढ़ाई जाएंगी। दरअसल, मद्रास आइआइटी की टीम ने बीते दिनों जिले के करीब 100 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया। जिसमें सिम्फी सॉफ्टवेयर संबंधी जरूरी बातें बताई गईं। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पढ़ाई से जुड़ी चीजें आसानी से बताई जा सकेंगी। सॉफ्टवेयर एक खास पैटर्न पर काम करेगा। आइएएस अधिकारी अंशुमन राज बताते हैं कि सिम्फी सॉफ्टवेयर काफी महंगा है। इससे त्वरण, गति सहित फिजिक्स से जुड़ी अन्य बारीकियां अपने ढंग से बताएंगे। विजुलाइज कर सिमुलेशन किया जाएगा। यानी चीजें चलती हुई दिखाई देंगी, फिर उन्हें उदाहरण देकर समझाया जाएगा। कुल मिलाकर वीडियो गेम की तरह पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए 10 से 12 तक बच्चे शामिल होंगे, जिन्हें मास्टर ट्रेनर पढ़ाएंगे। उन्हें तैयार किया जा रहा है। स्पेशल क्लास वाइस मॉड्युल भी तैयार किया गया है।
विजुलाइजेशन के लिए अवेयर करेगा सॉफ्टवेयर
आइआइटी से टॉप पास आउट आइएएस कलेक्टर हर्ष दीक्षित और अंशुमन राज ने यह शुरुआत की है। उन्होंने नवाचार करते हुए योजना बनाई है कि सिम्फी सॉफ्टवेयर बच्चों को जागृत करने के साथ ही अन्य विजुलाइजेशन के लिए अवेयर करेगा। उन्हें एक बेहतर प्लेटफॉर्म इससे मिलेगा। अंशुमन राज बताते हैं कि आम तौर पर यह सॉफ्ट वेयर यूरोप, सिंगापुर में उपयोग होता है। प्रति स्टूडेंट चार से पांच हजार खर्च आता है, लेकिन मद्रास टीम से टायअप कर यह यहां के बच्चों के लिए मुफ्त अरेंज कराया जा रहा है।
70 स्मार्ट क्लासेस से मॉर्डन एजुकेशन
कलेक्टर ने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से जिले में वर्तमान में संचालित 70 स्मार्ट क्लासेस और आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावास के बच्चों को चुना जाएगा। इन्हें नीट और आइआइटी से जुड़ी पुस्तकें भी मुहैया करवाई जाएंगी। स्मार्ट क्लासेस में पढ़ाने वाले जिले के टीचर्स को आईआईटी मद्रास के इम्युलेशन सॉफ्ट वेयर चलाने वाले विशेषज्ञों ने समझाइश दी। बच्चों को मॉर्डन एजुकेशन के बारे में वे बताएंगे, विजुलाइजेशन करके भी दिखाया जाएगा। बता दें कि स्मार्ट क्लासेस वाले स्कूलों में ई-लाइब्रेरी भी स्थापित है, जहां समार्ट टीवी के साथ ही एलईडी और इंटरनेट की सुविधा भी शुरू की जा रही है।
मद्रास आइआइटी की टीम ने बीते दिनों जिले के करीब 100 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया। जिसमें सिम्फी सॉफ्टवेयर संबंधी बातें बताई गईं। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पढ़ाई से जुड़ी चीजें आसानी से बताई जा सकेंगी। सॉफ्टवेयर एक खास पैटर्न पर काम करेगा। आईएएस राज बताते हैं कि सिम्फी सॉफ्टवेयर काफी महंगा है...
हाई स्कूल और हायर सेकंडरी लेवल के बच्चों को इस दायरे में रखा गया है। बाय ज्यूस और अन्य निजी वर्चुअल प्रोग्राम पर बेस्ड क्लासेस संचालित की जाएंगी। जिनके आधार पर यह शुरुआत की जा रही है। 70 स्मार्ट क्लासेस में सिम्फी सॉफ्टवेयर शुरू कर रहे हैं।
-हर्ष दीक्षित, कलेक्टर, राजगढ़
Published on:
01 Jul 2023 05:25 pm
