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4 साल की बच्ची का 5 साल के बच्चे से तय किया था रिश्ता, आज भी झेल रही दंश

चाय की गुमटी पर बुजुर्गों ने तय कर दिया था रिश्ता, 27 साल बाद अब तक दंश झेल रही नातिन...

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राजगढ़/ब्यावरा. प्रदेश के आखिरी छोर और राजस्थान की सीमा से लगा राजगढ़ जिला आज भी झगड़ा, नातरा जैसी कुप्रथा को इस सभ्य समाज में झेल रहा। कई बेटियों का भविष्य इसमें गड़बड़ा गया और कई माता-पिता इसका दंश झेलते आए हैं और झेल रहे हैं। राजगढ़ ब्लॉक के तंवरवाड़ क्षेत्र की 28 वर्षीय काजल (परिवर्तित नाम) झगड़ा प्रथा का दंश झेल रही हैं। उसके दादा और लड़के के दादाजी ने करीब 27 वर्ष पूर्व राजगढ़ में हाट-बाजार के दिन चाय की दुकान पर बैठकर रिश्ता तय किया था। चाय पीते-पीते दोनों को ख्याल आया कि आपकी नातिन (चार साल) और मेरा नाती (पांच साल) का है, इनके बारे में देखेंगे, सोचेंगे? इसके बाद न सगाई हुई न ही शादी हो पाई। कुछ साल बाद दोनों बुजुर्गों की मौत हो गई। परिजनों को यह बात पता थी कि दोनों बच्चों का विवाह बड़े होने पर करना है। समय बीतता गया, बाद में पता चला कि जिस लड़के से काजल का विवाह होना था, वह शराबी और निकम्मा निकला, कहीं से भी शादी करने योग्य नहीं था। ऐसे में काजल ने रिश्ते से इनकार कर दूसरी जगह शादी की इच्छा जताई।

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शादी करने पहुंचे तो 15 लाख का लेटर भेज दिया
काजल के परिजनों ने बेटी के लिए दूसरी जगह रिश्ते देखना शुरू किया। जैसे ही कहीं पर लड़का देखने पहुंचे तो पहले वाले लड़के के परिजन 15 लाख रुपए का लेटर लेकर पहुंच गए और कहा कि पहले हमारा निपटारा करो, तभी शादी हो पाएगी। नहीं देने पर कभी फसलें खराब करने का डर तो कभी पिंडावड़े, पेड़ जलाने का डर रहता। इसे लेकर काफी दिनों तक काजल का रिश्ता टलता रहा, आज भी उसका विवाह नहीं हो पाया। जैसे ही झगड़े का पता चला तो काजल से शादी करने के लिए और कोई लड़का शादी के लिए तैयार नहीं हुआ।

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बेटी के माता-पिता की मजबूरी
काजल और उसके परिजन पुलिस के पास भी पहुंचे लेकिन वहां से आश्वासन दिया गया कि आप शादी कीजिए कहीं परेशानी आएगी या वे लोग आएंगे तो हम बैठे हैं? लेकिन इसके बाद से कोई लड़का शादी के लिए आया ही नहीं। काजल बतातीं हैं कि समाज के लड़के इस घटना के बाद शादी के लिए आगे ही नहीं आए। सामाजिक परम्परा के अनुसार मैं दूसरी समाज में शादी कर नहीं सकती। झगड़े की इतनी मोटी रकम देने में मेरे माता-पिता सक्षम नहीं है। ऐसे में झगड़ा प्रथा ने एक युवती का जीवन उनके बुजुर्गों की चाय पर हुई चर्चा के कारण बिगाड़ डाला।

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इस कुप्रथा पर बड़े परिवर्तन की जरूरत : सुस्तानी
दोनों ही कुप्रथाओं को लेकर लाल चुनर गैंग के माध्यम से जागरूकता लाने वालीं मोना सुस्तानी बताती हैं कि झगड़ा और नातरा प्रथा पर शिकंजा कसने की जरूरत है। प्रशासनिक स्तर पर और बड़े प्रयासों की यहां जरूरत है। कई बेटियों को हम न्याय दिला चुके हैं लेकिन कई अभी भी इससे परेशान हैं, उनके लिए समाज के प्रभावी वर्ग को भी आगे आना होगा।

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हमने इसे लेकर अभियान चलाया है : एसपी
झगड़ा और नातरा प्रथा को लेकर पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा बताते हैं कि हमने विशेष अभियान महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए चला रखा है। कई केसेस भी थानों में दर्ज हुए हैं। उक्त पीडि़ता हमारे पास भी आई थी, हमने परिजनों को भी कहा है कि कहीं कोई बाधा नहीं आएगी, आप लोग नि:संकोच शादी कराएं, पुलिस आपके साथ है।

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