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शीतल जार व पाऊच का पानी बिगाड़ रहा लोगों की सेहत

कोई मानक तय नहीं
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राजनंदगांव

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Nakul Ram Sinha

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Updated: 5 Jun 2018, 12:10 PM IST

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शीतल जार व पाऊच का पानी बिगाड़ रहा लोगों की सेहत

राजनांदगांव / खैरागढ़. बिना आईएसआई मार्क और खाद्य विभाग से लाइसेंस लिए पानी पाऊच व बोतल के बाद कूल जार का पानी लोगों की सेहत का दुश्मन बनता जा रहा है। चिल्ड जार के नाम से बिक रहा यह पानी अलग तरह का ही प्रोडक्ट है। इसके लिए कोई मानक शासन द्वारा तय नहीं है। इसके बावजूद यह धंधा इलाकों में जोरों से फल फूल रहा है। पानी बेचने वाली कुछ कंपनियां शुद्ध पानी के नाम पर केवल ठंडा पानी बेचकर मालामाल हो रहें है। और इस पानी का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को यह भी पता नहीं है कि 24 घंटे तक ठंडा रहने वाला यह पानी ना लैब से होकर गुजरता है और ना ही इसका परीक्षण होता है। चिल्ड मशीन के जरिये पानी को ठंडा करके सीधे कूल जार में भरकर बेचा जा रहा है।

आईएसआई मार्क जरूरी
भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर में आईएसआई मार्क होना अनिवार्य है। सामान्य आम लोगों को इस बात का पता ही नहीं रहता की पानी की पैकेजिंग कब की है। जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। कंपनियों द्वारा लोगों के भोलेपन का लाभ उठाकर धड़ल्ले से अमानक पानी को बेचा जा रहा है।

दुकानों में खपातें है ठंडा पानी
ठंडा पानी होने की वजह से इनका सबसे ज्यादा खपत दुकानों में होती है। शहर के बख्शी मार्ग, नया बस स्टैंड, गोल बाजार, ईतवारी बाजार सहित निजी प्रतिष्ठानों, ऑफिसों, दुकानों में इन कंपनियों के कूल जार नजर आ जाएंगे। इसके साथ ही होटलो व किराना दुकानों में भी कूल जार की खपत सबसे अधिक होती है। पानी ठंडा होने के कारण लोगों द्वारा कूल जार का उपयोग ज्यादा किये जा रहे है। जिसका फायदा उठाकर कंपनियों द्वारा धड़ल्ले से अमानक पानी खपा रहें है। जिससे सेहत को नुकसान है।

धड़ल्ले से बिक रहा चिल्ड वाटर
शहर सहित आसपास के इलाकों में बाहर से संचालित कंपनियों द्वारा चिल्ड वाटर जार भरकर बेचने का काम किया जा रहा है। पैकेज्ड ड्रिकिंग वाटर के लिए अलग- अलग तरीकों सेे पानी को शुद्ध किया जाना चाहिए लेकिन इन कपंनियों के पास ना लैब है और ना ही जरूरी इंस्ट्रचर। काफी छोटी जगह में सामान्य फिल्टर लगा कर पानी को शुद्ध करने का खेल जारी है, चिल्ड वाटर बेचने का धंधा जोरों से चलाया जा रहा है।