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पत्रिका महिला सुरक्षा अभियान: महिलाओं का बढ़ाया हौसला, समाज में मिलेगा बराबरी का हक..

Patrika Mahila Suraksha: राजनांदगांव जिले में महिला सुरक्षा को लेकर पत्रिका की ओर से चलाया जा रहा अभियान बेहद सराहनीय है।

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महिला सुरक्षा अभियान: कार्यस्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरे, स्वयं भी रहें सतर्क, बढ़ते अपराध पर बोलीं महिलाएं

Patrika Mahila Suraksha: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में महिला सुरक्षा को लेकर पत्रिका की ओर से चलाया जा रहा अभियान बेहद सराहनीय है। इस अभियान ने महिलाओं की हिम्मत बढ़ाई है, हौसला दिया है कि वे अपने हक के लिए व प्रताडऩा के खिलाफ मजबूती के साथ लड़ सकती हैं।

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हक की बात..

आज समाज में महिलाओं को बराबरी का हक देने की बात तो हो रही है पर उत्पीडऩ के मामले दिल को झकझोर रहे हैं। बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। यह समाज के लिए बहुत चिंता का विषय है। यह बातें पद्मश्री से सम्मानित फुलबासन यादव ने पत्रिका से विशेष चर्चा के दौरान व्यक्त कीं।

फुलबासन के नेतृत्व में राजनांदगांव जिले में 2 लाख से अधिक महिलाएं स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। समूह बनाने के दौरान भी फुलबासन सहित अन्य महिलाओं को समाज के ताने सुनने पड़े। घर से निकलने पर पुरुष प्रधान समाज के लोग समूह की गतिविधियों पर टिप्पणी करते थे पर अब समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ लड़ रही हैं।

पत्रिका ने समाज को दिया स्पष्ट संदेश

फुलबासन का कहना है कि पत्रिका ने महिला सुरक्षा व रक्षा कवच अभियान के माध्यम से समाज को संदेश दिया है कि नारी की सुरक्षा सर्वोपरि है। फुलबासन का कहना है कि महिला उत्पीडऩ जैसे मामलों के निराकरण के लिए विभागीय और पुलिस की अपनी टीम काम करती है पर जिला स्तर पर एक कमेटी का गठन होना जरूरी है।

फुलबासन ने बताया-कैसी हो कमेटी

इस कमेटी में प्रशासनिक वर्ग से महिला, पुरुष अधिकारी, पुलिस, समाजसेवी, पत्रकार सहित जागरूक नागरिकोंं को शामिल किया जाना चाहिए। कमेटी में शामिल सदस्यों का नाम गोपनीय रहे। हालांकि हैल्पलाइन नंबर को सार्वजनिक रखें ताकि पीडि़त महिलाएं संपर्क कर समाधान पा सकें। दरअसल छेड़छाड़ सहित घरेलू हिंसा से पीडि़त कई महिलाएं सामने नहीं आना चाहती। ऐसे में कमेटी तक शिकायत पहुंचने पर पड़ताल होगी और न्याय दिला सकेंगे।

प्रताडऩा के रोज आ रहे मामले

फुलबासन यादव ने बताया कि समाजसेवी व महिला स्व सहायता समूह से जुड़े होने की वजह से रोज एक न एक प्रताडि़त महिला घर पहुंचती है। महिलाओं से घटनाक्रम की पूरी जानकारी लेकर पहले तो अपने स्तर पर सुलझाने की कोशिश करते हैं, अगर दूसरा पक्ष मानने और सुधरने को तैयार नहीं रहता तो पुलिस की भी मदद लेते हैं।

बताया कि ज्यादातर महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं। फुलबासन ने कहा कि महिलाओं को भी खुद की सुरक्षा को लेकर सजग होना पड़ेगा। अगर कहीं बाहर जा रहे हैं तो परिजनों को सूचना दें, कहीं कोई दिक्कत महसूस होती है तो बेझिझक पुलिस के हेल्प लाइन नंबर की मदद लें।