
रामपुर। उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट पर अब पूरे देश की निगाहें लग गई हैं। यहां दो 'दुश्मन' आमने- सामने होंगे। गठबंधन की तरफ से जहां सपा के टिकट पर आजम खान मैदान में हैं, वहीं भाजपा ने कभी सपा से सांसद रहीं जया प्रदा पर भरोसा जताया है। बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा और आजम खान की दुश्मनी तो जग जाहिर है। अब दोनों आमने-सामने हैं।
भाजपा के टिकट पर हैं चुनाव मैदान में
जया प्रदा आज भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। वह रामपुर से दो बार सांसद रह चुकी हैं। 2014 के लोक सभा चुनाव में बिजनौर सीट पर हार के बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली थी। उनको राजनीति में लाने वाले अभिनेता से नेता बने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव थे। उन्होंने 1994 में जया प्रदा को तेलुगु देशम पार्टी ज्वाइन कराई थी। इसके बाद वह तेलुगु देशम के चंद्रबाबू नायडू वाले गुट में चली गई थीं। 1996 में वह आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचीं। बाद में चंद्रबाबू नायडू का साथ छोड़कर वह समाजवादी पार्टी (सपा) में आ गईं।
2004 में सपा से मिला था टिकट
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जया प्रदा को रामपुर की राजनीति में लाने वाले आजम खान ही थे। सपा ने 2004 के लोकसभा चुनाव में जया प्रदा को रामपुर से टिकट दिया था। आजम खान ने उस चुनाव में जया प्रदा के लिए वोट मांगे थे। जया प्रदा ने 2004 में कांग्रेस उम्मीदवार बेगम नूर बानो को 85 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी। इसके बाद जया प्रदा और आजम खान के रिश्तों में खटास आ गई। उस समय अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव में काफी करीबी थी।
2009 में दोबारा मिला टिकट
2009 के लोकसभा चुनाव में आजम खान ने जया प्रदा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उनके विरोध के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने जया प्रदा को यहां से दोबारा टिकट दिया था। इसके पीछे अमर सिंह का हाथ था। अमर सिंह जया प्रदा के साथ खड़े थे जबकि आजम खान विरोध में आ गए थे। इस दौरान जया प्रदा ने आजम खान पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे। उस चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बेगम नूर बानो को शिकस्त दी थी। इसके बाद हालात कुछ ऐसे हुए कि अमर सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया गया। उनके साथ जया प्रदा ने भी सपा को अलविदा कह दिया। 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के टिकट पर बिजनौर से लड़ा, लेकिन उसमें उन्हें करारी हार मिली। अब वह फिर से आजम खान के सामने मैदान में हैं।
यह है वजह
बताया जाता है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में आजम खान अपने एक करीबी नसीर खान को टिकट दिलाना चाहते थे जबकि मुलायम सिंह ने जया प्रदा को मौका दिया। इसके बाद आजम खान इसके खिलाफ खुलकर सामने आ गए थे। बात ज्यादा बढ़ी तो आजम खान को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित तक कर दिया गया था।
यह भी पढ़ें:
Published on:
27 Mar 2019 12:47 pm
बड़ी खबरें
View Allरामपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
