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एम्बुलेंस नहीं मिली तो बीमार पिता को साइकिल से अस्पताल लेकर पहुंचे बेटे

सरकारी एम्बुलेंस नहीं आई और प्राइवेट एम्बुलेंस के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में गरीब बेटों ने साइकिल काे ही एम्बुलेंस बना लिया। खुद पैदल चलते रहे और पिता काे साइकल पर बैठा लिया। इस तरह कई किलोमीटर पैदल चलकर दोनों बेटे पिता काे अस्पताल लेकर पहुंचे।

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rampur news

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
रामपुर. दिल्ली-नैनीताल हाइवे पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की कलई खोल दी। बीमार पिता के लिए एम्बुलेंस (ambulance) सेवा नहीं मिली ताे दो भाईयों ने मिलकर साइकिल काे ही एम्बुलेंस बना दिया। दोनों ने पिता काे साइकिल ( bicycle ) पर बैठाया और खुद पैदल चलते रहे। इस तरह कई किलोमीटर पैदल सफर तय करके दोनों बेटे पिता काे साइकिल से अस्पपताल लेकर पहुंचे।

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यह घटना किसी दूर-दराज इलाके की नहीं बल्कि यूपी रामपुर की है। दोनों बेटे दिल्ली-नैनीताल हाइवे से होते हुए अपने पिता काे अस्पताल लेकर पहुंचे। दोनों ने साइकिल के कैयिरयर पर एक कैरेट बांधी और उसमें अपने पिता काे बैठाकर दोनों पैदल साइकिल काे लेकर अस्पताल तक गए। पिता काे अस्पताल से दवा दिलाकर वापस घर लाैट रहे इन दोनों बेटों से पत्रिका संवाददाता ने बात की ताे इन्हाेंने बताया कि वह बहादुरगड़ के रहने वाले हैं। अक्सर उनके पिता की तबीयत खराब रहती है। सरकारी एम्बुलेंस को कॉल की थी लेकिन सरकारी एम्बुलेंस नहीं आई। पिता की तबियत खराब थी।

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जेब में इतने पैसे नहीं थे कि प्राइवेट एम्बुलेंस वालों को भी दें और फिर डॉक्टर की फीस और दवा भी खरीद लें। इसलिए उन्हाेंने घर पर माैजूद पुरानी साइकिल को ही एम्बुलेंस बना लिया। दोनों पिता काे साईकिल से शहर वाले डॉक्टर के पास लेकर गए। दोनों ने यह भी बताया कि वह दो बार पिता काे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने ठीक तरह से नहीं देखा और दवा भी नहीं दी। इसलिए मजबूर होकर इस बार उन्हे प्राइवेट डॉक्टर के यहां जाना पड़ा। जब इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी से बात की गई ताे उन्हाेंने कहा कि यदि ऐसा है तो मामला गंभीर है पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। पीड़ित परिवार को स्वास्थ्य सेवाए उपलब्ध कराई जाएंगी और परिजनों का भी चेकअप कराया जाएगा।

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