
आजम खान की बढ़ी सजा की वजह से समाजवादी पार्टी के लिए गढ़ बचाना मुश्किल? फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Azam Khan Latest News UP Politics:उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीतियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं। रामपुर जिले में समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने परंपरागत वोट बैंक और सीटों को बचाने की होगी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे आजम खान फिलहाल जेल में हैं और उनके जल्द बाहर आने की संभावना भी कम नजर आ रही है।
आजम खानऔर उनके बेटे, पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम, दो पैन कार्ड मामले में जेल में बंद हैं। हाल ही में आजम खान की सजा बढ़कर 10 साल हो जाने से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कानूनी स्थिति को देखते हुए दोनों नेताओं के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाएं भी लगभग समाप्त मानी जा रही हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा का उत्साह बढ़ा हुआ है। पार्टी अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पूरी ताकत से जुटी हुई है। रामपुर जिले की सभी विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वर्तमान में रामपुर जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन सीटों—रामपुर शहर, बिलासपुर और मिलक—पर भाजपा का कब्जा है। रामपुर शहर सीट, जिसे कभी आजम खान का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, 2022 के उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना के खाते में चली गई थी। वहीं स्वार सीट भाजपा गठबंधन की सहयोगी पार्टी अपना दल के पास है।
फिलहाल जिले में केवल चमरौआ विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। यहां से आजम खान के करीबी माने जाने वाले नसीर खान विधायक हैं। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए आगामी चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आजम खान और अब्दुल्ला आजम चुनाव मैदान में होते तो रामपुर शहर और स्वार जैसी सीटों पर सपा की स्थिति कहीं अधिक मजबूत होती। आजम खान रामपुर शहर सीट से दस बार विधायक रह चुके हैं, जबकि अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं।
आजम खान लंबे समय तक रामपुर की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। जिले में प्रत्याशी चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में बड़ा सवाल यह है कि जेल में रहते हुए पार्टी नेतृत्व उनकी राय को कितना महत्व देगा।
लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने आजम खान की पसंद के विपरीत मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को उम्मीदवार बनाया था। उस समय स्थानीय स्तर पर भी कई सपा कार्यकर्ता पूरी सक्रियता से चुनाव प्रचार में नहीं उतरे थे। इस घटना को पार्टी के अंदर मौजूद मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा गया था।
इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद रामपुर में समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता अब भी मानते हैं कि विधानसभा चुनाव में अंतिम फैसला आजम खान की राय से ही होगा। इसी विश्वास के साथ संगठनात्मक तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
सपा ने जिले की सभी विधानसभा सीटों पर संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। विभिन्न तहसीलों में विधानसभा क्षेत्र अध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी कार्यालय खोले जा रहे हैं और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद जारी है।
पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को जोड़ने के लिए PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर विशेष जोर दे रही है। लगातार बैठकें आयोजित कर सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की जा रही है।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय सागर का कहना है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक सभी विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जा चुका है और प्रत्येक बूथ पर बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि रामपुर जिले की हर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी और उम्मीदवारों के चयन में आजम खान की भूमिका निर्णायक रहेगी।
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Published on:
29 May 2026 10:35 am
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