
अस्पताल में भर्ती उम्मे हबीबा। फोटो- (X- @subhi_karma)
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच 13 दिन से आमरण अनशन पर बैठी उम्मे हबीबा की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन अस्पताल में भी उन्होंने खाना खाने से इनकार कर दिया है। हबीबा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से आंदोलनकारी छात्रों की मांगों पर हस्तक्षेप करने की अपील की है। बोकारो जिले के कसमार की रहने वाली हबीबा ने बताया कि अनशन के दौरान उनका वजन करीब सात से आठ किलो कम हो गया है।
उन्होंने कहा कि शरीर लगातार कमजोर हो रहा है और उन्हें नहीं पता कि वह कितने दिन तक यह लड़ाई जारी रख पाएंगी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि शारीरिक कमजोरी के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है। हबीबा ने कहा कि छात्रों की लड़ाई किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि 23 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए और उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से ठोस आश्वासन मिलने पर वह अनशन खत्म करने पर विचार कर सकती हैं।
उन्होंने राहुल गांधी से भी रांची आकर आंदोलनकारी छात्रों और अस्पताल में भर्ती अनशनकारियों से मिलने की अपील की। हबीबा ने कहा कि झारखंड में कांग्रेस गठबंधन सरकार का हिस्सा है, इसलिए पार्टी की भी छात्रों के प्रति जिम्मेदारी बनती है। सरकार के इस दावे पर कि आंदोलनकारियों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं, हबीबा ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की बात मानी है, लेकिन टीडीपीएल एजेंसी और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई मुद्दे अभी बाकी हैं।
उनके अनुसार करीब 80 प्रतिशत मांगें मानी गई हैं। हबीबा ने कथित भर्ती गड़बड़ियों की सीआईडी जांच के बजाय सीबीआई जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि पूर्व की सीआईडी जांचों पर छात्रों को भरोसा नहीं हुआ। आंदोलन के 23वें दिन जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच ने भी आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। मंच ने मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
Updated on:
16 Aug 2026 07:59 pm
Published on:
16 Aug 2026 07:49 pm
