
रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी (फोटो- ANI)
JPSC-JSSC Student Protest Ranchi: रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे उम्मीदवारों का गुस्सा चरम पर पहुंच चुका है। रविवार को JPSC-JSSC सुधार मंच के आह्वान पर झारखंड के सभी 24 जिलों में पुतला दहन कार्यक्रम किया गया। इसी कड़ी में राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर छात्रों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी छात्र ने अपना सिर मुंडवाया और प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया।
प्रदर्शनकारी बाहा लिंडा पुतला दहन कार्यक्रम में सिर मुंडवाकर पहुंचे। आदिवासी परंपराओं के अनुसार, वे दांत साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाली सखुआ (साल के पेड़) का दतुअन, उड़द और चावल साथ लाए थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपना बड़ा भाई मानते रहे हैं। इसलिए, एक छोटे भाई के तौर पर उन्हें लगा कि उनके प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार के लिए अपना तन, मन और संसाधन समर्पित करना उनका फर्ज है। उन्होंने कहा कि इस फर्ज को निभाते हुए वे पुतला जलने के बाद बची राख को खुद सुवर्णरेखा नदी में विसर्जित करेंगे।
बाहा लिंडा ने कहा कि इन नेताओं से न्याय की उम्मीद करना बेकार है, क्योंकि वे मरे हुए लोगों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियां परिवारवाद की राजनीति में फंसी हुई हैं और झारखंड के लोगों से वोट लेने के बाद, वे सिर्फ अपने परिवारों की तरक्की पर ध्यान देती हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान ये नेता आदिवासी समुदाय के लोगों को बराबरी और रिश्तेदारी वाले शब्द जैसे दादा, भैया, बुचू, आयो और आबा से संबोधित करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद, वे युवाओं को नजरअंदाज करते हैं और उनके साथ बुरा बर्ताव करते हैं।
छात्र बहा लिंडा ने आरोप लगाया कि चल रहे आंदोलन और भूख हड़ताल के बावजूद, वरिष्ठ नेता सीधी बातचीत से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों से बात करने के लिए जूनियर अधिकारियों, मंत्रियों या पुलिस को भेजती है, जो बस उनसे पुतले न जलाने का अनुरोध करते हैं। अगर नेताओं ने सच में छात्रों को अपना माना होता, तो वे खुद विरोध स्थल पर आते, छात्रों के साथ छोटे भाई-बहनों जैसा व्यवहार करते, उनकी जायज मांगें सुनते और कोई समाधान निकालते।
बता दें कि उम्मीदवार करीब तीन हफ्तों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। वे कथित अनियमितताओं के कारण JSSC-CGL और JPSC परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की स्वतंत्र CBI जांच की मांग कर रहे हैं। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर 18 अगस्त तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 20 अगस्त को हजारों की संख्या में इकट्ठा होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
Updated on:
16 Aug 2026 08:52 pm
Published on:
16 Aug 2026 08:19 pm
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