
(रांची): देश भर में मॉब लिचिंग की बढ़ती घटनाओं के बाद अदालत की ओर से इस तरह की घटना से पीड़ित और उनके आश्रितों की सहायता के लिए समुचित नीति बनाने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद झारखंड सरकार ने भी इस तरह की घटनाओं में पीड़ित और उनके आश्रितों को विक्टिम कंप्लसेशन स्कीम (झारखण्ड पीड़ित प्रतिकर (संशोधन) स्कीम-2016) के तहत मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि विभिन्न तरह के मामलों में पीड़ित और उनके आश्रितों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2016 में ही एक नीति बनायी गयी है। इसके तहत मॉब वॉयलेंस और लिचिंग मामले में किसी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को दो लाख रुपए की मुआवजा राशि दी जाएगी, जबकि स्थायी विकलांगता (80 प्रतिशत या अधिक) में भी 2 लाख रुपए, आंशिक विकलांगता (40 से 80 प्रतिशत) में 1 लाख रुपए और शरीर का 36 प्रतिशत से अधिक जलने में 2 लाख रुपए की सहायता, भ्रूण हानि में 50 हजार रुपये, प्रजनन क्षमता की हानि पर 1.5लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं यदि पीड़ित व्यक्ति की उम्र 14व र्ष से कम है, तो मुआवजा राशि की रकम दुगुनी हो जाएगी।
झारखण्ड पीड़ित प्रतिकर (संशोधन) स्कीम-2016 के तहत पूर्व से ही कई अन्य मामलों में भी पीड़ितों को सहायता राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिसके तहत तेजाबी हमला में 3 लाख रुपए, बलात्कार में 3 लाख रुपए, नाबालिग का शरीरिक शोषण मामले में 2 लाख रुपए, मानव तस्करी से पीड़ित का पुनर्वास में 1 लाख, यौन प्रताड़ना में 50 हजार रुपए मुआवजा का प्रावधान है।
Published on:
21 Aug 2018, 7:52 PM IST
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