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​भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ झारखंड बंद का कुछ इलाकों में आंशिक असर

भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दिए जाने के विरोध में आहूत एकदिवसीय झारखंड बंद का पश्‍चिम सिंहभूम और चतरा समेत कुछ जिलों में आंशिक असर देखने को मिला

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jharkhand bandh

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रांची। झारखंड दिशोम पार्टी और आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दिए जाने के विरोध में सोमवार को आहूत एकदिवसीय झारखंड बंद का पश्‍चिम सिंहभूम और चतरा समेत कुछ जिलों में आंशिक असर देखने को मिला। चाईबासा में बंद का खासा असर देखने को मिला, बाजार और कई स्कूल बंद रहे और वाहनों का परिचालन ठप्प रहा। वहीं राजधानी रांची में बंद का कोई खास असर देखने को नहीं मिला और जनजीवन सामान्य रहा। सभी दुकानें-व्यापारिक प्रतिष्ठान, सरकारी कार्यालय, स्कूल-कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थान तथा पेट्रोल पंप खुले है। सड़कों पर वाहनों का परिचालन भी सामान्य दिनों की तरह चल रहा है। वहीं बंद के समर्थन में शहर में जेडीपी या आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से कोई कार्यकर्त्ता भी सड़क पर नहीं उतरे। हालांकि एहतियात के तौर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये है।


कांग्रेस विधानसभा में उठाएगी मुद़दा

वहीं लोहरदगा से विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत ने भूमि अधिग्रहण बिल के संशोधन पर कांग्रेस की मंशा साफ कर दी है। सुखदेव भगत ने कहा कि आने वाले विधानसभा सत्र को भूमि अधिग्रहण बिल के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का काम किया जाएग। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिल को लाने के लिए इतना उतावली क्यों हैं यह समझ से परे है।

जनता को किया दिग्भ्रमित


दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा ने इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों पर जनता को दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन और झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी को इस मुद्दे पर बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि संशोधन बिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कृषकों या रैयतों की जमीन की जमीन का अधिग्रहण कर पूंजीपतियों को दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्यां में कोई बाधा न पड़े, इसे लेकर यह संशोधन बिल लाया गया है।