
तापमान में गिरावट पारा 7.2 डिग्री, कृषि विभाग ने जारी की कृषकों को लिए सलाह
रतलाम. ठिठुरन भरी सर्द हवा के साथ हर रात का पारा लुढक़ता जा रहा हैं। सोमवार को दिन का तापमान 7.2 डिग्री पर आ गया। प्रदेश में इस समय कड़ाके के ठंड पड़ रही है, इसलिए पाला पडऩे की संभावना होने पर सलाह दी जाती है कि खेतों में हल्की सिंचाई अवश्य करें। कोहरे भरी सुबह ने लोगों को सुबह और शाम अलाव जलाने पर मजबूर कर दिया। आमजन के साथ ही अब देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी ऊनी वस्त्रों पहनाए जा रहे हैं। पाले की संभावना के चलते कृषि विभाग की ओर से भी किसानों को फसल बचाने और पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए सलाह दी गई हैं।
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग नीलमसिंह चौहान ने बताया कि वर्तमान में तापमान में गिरावट के कारण रबी फसलों में पाले का प्रभाव होने की संभावना है। यदि शाम के समय उत्तरी हवा चलती है, तो किसान खेत के पास मेड़ो पर 6-7 जगह धुंआ कर दें, ताकि तापमान जमाव बिन्दू तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है। नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढक दें।
ये भी कर सकते किसान उपाय
चौहान ने बताया कि पाला पडऩे की संभावना हो उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिडक़ाव करना चाहिए। इसके लिए एक लीटर गंधक के तेजाब को 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टर क्षेत्र में प्लास्टिक के स्प्रेयर से छिडक़े। ध्यान रखे की पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगें। छिडक़ाव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर व पाले की संभावना बनी रहे तो गंधक के तेजाब को 15-15 दिन के अंतर से दोहराते रहें। सल्फर 90 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी पाउडर को 3 किलोग्राम एक एकड़ में छिडक़ाव करने के बाद सिंचाई करें। सल्फर 80 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी पाउडर को 40 ग्राम प्रति पम्प (15 लीटर पानी) में मिलाकर स्प्रे करें।
फसल-पशुओं के बचाव में बरते सावधानियां
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. सीआर कांटवा ने बताया कि कड़ाके के सर्दी पड़ रही है, इसलिए पाला पडऩे की संभावना होने पर किसान खेतों में हल्की सिंचाई अवश्य करें। जनवरी से फरवरी माह तक अधिक ठंड पडऩे के कारण पशु तथा बछड़ों आदि को भी रात्रि के समय घरों के अंदर बांधें तथा उन्हें बोरे तथा जूट के बोरे तथा टाट-पट्टी से ओढ़ाकर ठंठ से बचाए। सर्दी से बचाव के लिए पशुओं को हरा चारा व मुख्य चारा एक से तीन के अनुपात में मिलाकर खिलाना चाहिए। पशुओं को सुबह 9 से पहले और शाम को 5 बजे के बाद पशुशाला से बाहर न निकालें।
तापमान बढऩे से काफी हद तक पाला से बचाया जा सकता
पाला पडऩे की अधिक आशंका होने पर फसलों तथा उद्यान की फसलों में घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत डब्ल्यू. पी. का 2 से 2.5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर की दर से पानी में घोल बनाकर 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर फसलों के ऊपर प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें। इससे 2 से 2.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान बढऩे से काफी हद तक पाला से बचाया जा सकता है।
बारानी फसलों में पाले की आशंका होने पर व्यावसायिक गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत के घोल का अर्थात् 1 मिलीलीटर दवा को प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसलों के ऊपर छिडक़ाव करें परंतु ध्यान रखें की इसकी संतुलित और निश्चित मात्रा का ही प्रयोग करें अन्यथा फसल को नुकसान हो सकता है। इसी प्रकार इसके स्थान पर थायो यूरिया का 0.5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोल की दर से छिडक़ाव करने से भी पाला से काफी हद तक फसलों को बचाया जा सकता है। प्रत्येक अवस्था में पानी की मात्रा प्रति एकड़ डेढ़ से दो सौ लीटर अवश्य रखें।
पौधों को प्लास्टिक की चादर से ढक करके बचाया जा सकता
पाला से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है। इसलिए रात्रि के समय नर्सरी में लगे पौधों को प्लास्टिक की चादर से ढक करके बचाया जा सकता है। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है जिसके कारण तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंचता है और पौधे पालें से बच जाते हैं। लेकिन यह तकनीकी कम क्षेत्र के लिए उपयोगी है। जिन किसान भाइयों ने 1 से 2 वर्ष के फलदार पौधों का अपने खेतों में वृक्षारोपण किया हो उन्हें बचाने के लिए पुआल, घास-फूस आदि से अथवा प्लास्टिक की सहायता से ढककर बचायें। प्लास्टिक की सहायता से क्लोच अथवा टाटिया बनाकर पौधों को ढक देने से भी पालें से रक्षा होती है। इसके अलावा थालों के चारों ओर मल्चिंग करके सिंचाई करते रहें।
ठंड के मौसम में पशुओं को कभी भी ठंडा चारा व दाना नहीं देना चाहिए
जनवरी से फरवरी माह तक अधिक ठंड पडऩे के कारण पशु तथा बछड़ों आदि को भी रात्रि के समय घरों के अंदर बांधें तथा उन्हें बोरे तथा जूट के बोरे तथा टाट - पट्टी से ओढ़ाकर ठंठ से बचायें। इसी प्रकार मुर्गी तथा बकरी घर को भी चारों तरफ से पॉलीथिन की शीट या टाट-पट्टी आदि से बांधकर ठंडी हवाओं से चारों तरफ से बचायें। छोटे किसान जहां पर खेतों का क्षेत्रफल कम हो वहाँ मध्यरात्रि के बाद मेड़ों के ऊपर उत्तर तथा पश्चिम की तरफ घास-फूस आदि में थोड़ी नमी बनाकर उसको जलाकर धुआ करें । ठंड के मौसम में पशुओं को कभी भी ठंडा चारा व दाना नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे पशुओं को ठंड लग जाती है। पशुओं को ठंड से बचाव के लिए पशुओं को हरा चारा व मुख्य चारा एक से तीन के अनुपात में मिलाकर खिलाना चाहिए। ठंड के मौसम में पशुपालकों को पशुओं के आवास प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें। पशुशाला के दरवाजे व खिड़कियों पर बोरे लगाकर सुरक्षित करें। जहां पशु विश्राम करते हैं वहां पुआल, भूसा, पेड़ों की पत्तियां बिछाना जरूरी है। ठंड में ठंडी हवा से बचाव के लिए पशु शाला के खिड़कियों, दरवाजे तथा अन्य खुली जगहों पर बोरी टांग दें। सर्दी में पशुओं को सुबह नौ बजे से पहले और शाम को पांच बजे के बाद पशुशाला से बाहर न निकालें।
Updated on:
05 Jan 2026 10:32 pm
Published on:
05 Jan 2026 10:30 pm
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