रतलाम। अगर आपके यहां विवाह है और आप रतलाम के इन पंडितजी की सेवा चाहते है तो दक्षिणा देने से पहले आपको प्रकृति से प्यार करना सीखना होगा। जीं हां, बात थोड़ी अजीब है, लेकिन यह सत्य है की शहर के इंद्रा नगर में रहने वाले एक युवा पंडित जी इन दिनों शहर ही नहीं, बल्कि जिले के बाहर भी नाम कमा रहे है। वह भी सिर्फ अपने पंडीत के ज्ञान की वजह से नहीं, बल्कि विवाह के समय जब सात फेरों की बारी आती है, तब एक शर्त रख देते है। इस शर्त को निभाए बगैर विवाह अधूरा रहता है।

घर में कोई अनुष्ठान करवाना हो या ग्रहों की शांति या कुण्डली का मिलान कई धार्मिक आयांजनो में अगर आप किसी ज्योतिष या पण्डित को बुलाते है, तो बेशक वह सभी धार्मिक कार्य करवाते है जो जजमान करवाना चाहते है, लेकिन रतलाम शहर मे एक पंडीत है जो इन आयोजनो को करने से पहले पौधारोपण करवाता है। जीं हां, इन्द्रा नगर निवासी ज्योतिष संजय दबे पर्यावरण प्रेमी भी है, जो धार्मिक अनुष्ठानों से पहले यजमानो को पौधारोपण करवाते है।
दक्षिणा नहीं, शर्त निभाना जरूरी हैउन्हें यजमान की दक्षिणा से कोई लेना देना नहीं अगर वह पौधरोपण करता है तभी उनके यहां अनुष्ठान होते है। इसके लिए बाकायदा एक फॉर्म होता है , जिसे यजमान भरता है और कितने पौधे लगाने है उसकी संख्या भी निधार्रित होती है। पिछले सात सालो से इस अनुठे कार्य में लगे दबे का मकसद प्रकृति को हरा भरा बनाना है। इस पूनित कार्य में लगे संजय दबे का कहना है कि फल और फूल तो सभी के लिए उपयोगी होते है।

इनकी छाल ,तना जड़ तक काम में आती है। इनकी विधि- विधान से पूजा करने पर मनोकामनांए भी पूरी हो जाती है। इसके साथ ही मनुष्य के दोष दूर करने मे भी यह उपयोगी साबित होते है। पेड़ पौधो का हमारे शास्त्र मे जो महत्व है , उन्हें अब लोग नकारने लगे है। एेसे मे पर्यावरण संरक्षण का उद्वेश्य लेकर चला हुं जो सफल होने लगा है।