
रतलाम. डिजिटल युग में इंटरनेट गेम बेहद लोकप्रिय और ट्रेंडिंग बन गया है। इसने बच्चों मन को इस कदर अपनी गिरफ्त में ले लिया है कि वे गेम खेलने की सबसे उच्चतम स्थिति यानि इसके आदी हो चुके हैं। 15 से 18 साल की आयु के 153 बच्चों में किए गए सर्वे में साढ़े छह फीसदी बच्चे इंटरनेट गेम के आदी पाए गए हैं। दूसरी तरफ 19 फीसदी बच्चे ऐसे भी सामने आए हैं जो इस स्थिति में पहुंचने की कगार पर पहुंच चुके हैं। चौंकाने वाले ये आंकड़े रतलाम मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की तरफ से किए गए एक सर्वे में सामने आए हैं।
इस वर्ग के बच्चों पर किया सर्वे
मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से ये सर्वे शहर के दो निजी विद्यालयों में किया गया। सर्वे में कक्षा 11वीं और 12वीं के 153 छात्रों को शामिल किया गया था। जिनमें कक्षा 11वीं के 76 छात्र और कक्षा 12 के 77 छात्रों को लिया गया । इनकी आयु 15 से 18 वर्ष के बीच थी। यानि इंटरनेट गेम खेलने वालों के सर्वे में शामिल बच्चों की औसत आयु 16 वर्ष थी। 15 साल की उम्र के 29, 16 साल की उम्र के 47, 17 साल की उम्र के 52 और 18 साल की उम्र के 25 छात्रों पर भी ये सर्वे किया गया।
सर्वे करने के मापदंड
- वैध इंटरनेट योजना के साथ एंड्रॉइड/ आईओएस स्मार्ट फोन रखने वाले किशोर।
- कक्षा 11वीं या 12वीं में पढऩे वाले किशोरों को ही शामिल किया जाएगा।
- वे किशोर पिछले 12 महीनों से अधिक समय से अपने स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं।
यह हैं गेम के दुष्प्रभाव
- गेमर्स अपने खाने, सोने और सामाजिक जीवन से समझौता करते हैं।
- गेम खेलने से गेमर्स के मूड पर असर पड़ रहा है।
- ऐसे छात्रों को उन दोस्तों के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ा जो गेमिंग में गहरे थे।
- कुछ हिंसक खेल खेलने से उन्हें आपराधिक गतिविधि की ओर बढ़ावा मिला है।
- अपने दोस्तों के बीच मुख्य समस्या यह देखी कि वे आक्रामक व्यवहार विकसित करते हैं। आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं।
- ध्यान केंद्रित करने में सक्षम नहीं होते हैं, अक्सर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उनकी दृष्टि खराब होती है और अकेले रहने का आनंद लेते हैं और किसी के साथ बातचीत नहीं करते हैं।
यह रखें सावधानी
- खेलने के लिए समय सीमा निर्धारित करें और उनका पालन करें।
- फोन और अन्य गैजेट्स को बेडरूम से बाहर रखें ताकि आप रात में न खेलें।
- व्यायाम सहित हर दिन अन्य गतिविधियाँ करें। यह लंबे समय तक बैठने और खेलने के स्वास्थ्य जोखिमों को कम करेगा।
- बच्चा इंटर्नेट गेम खेलते हैं तो उनके स्वभाव में होने वाले किसी भी बदलाव पर ध्यान दे और तुरंत काउंसलर या चिकित्सक से सम्पर्क करें।
- बच्चों के फ़ोन या कम्प्यूटर की जांच करते रहे। प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर पेरेंट कंट्रोल का ऑप्शन ऑन करें।
- प्रतिदिन 30 मिनट का समय बच्चों के लिए निकाले और उनसे बात करें और अपने अनुभवों को साझा करें।
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Published on:
14 Feb 2022 06:00 am
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