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प्रमोशन के निर्णय का जमकर स्वागत, ये बोले लोग सोशल मीडिया पर

प्रमोशन के निर्णय का जमकर स्वागत, ये बोले लोग सोशल मीडिया पर    

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reservation in promotion supreme court verdict today hindi news

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रतलाम। सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 2006 के नागराज केस के फैसले को सही ठहराया है, जिसमें प्रमोशन में आरक्षण के फैसले को जरूरी नहीं बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आज के फैसले में राज्य सरकारों के ऊपर छोड़ दिया है कि वे चाहे तो प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है। कोर्ट के निर्णय के बाद सोशल मीडिया पर बहस का दौर शुरू हो गया है। जहां आरक्षण समर्थक इसको कायम रखने के पक्ष में है, वही सपाक्स, करणी सेना ने राज्य सरकार से तुरंत इस मामले में अपना पक्ष साफ करने को कहा है।

रतलाम के सामान्य, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के संगठन ने कहा है कि कोर्ट का यह फैसला सही है, लेकिन यह पूरी जीत नहीं है। फेसबुक पेज पर सैकड़ों लोगों ने अपने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जिसमें किसी ने इस फैसले को सही बताया तो किसी ने कहा कि राज्य सरकारों को आरक्षण लागू करने का अधिकार देकर ठीक नहीं हुआ है। कुछ लोगों ने इस मामले में सरकार को जवाबदेही देने को सही माना है तो कुछ इसके खिलाफ है।

क्या कहते हैं लोग यहां पढे़ं


- रेलवे में मजदूर संघ में गौरव दुबे कहते हैं कि कोर्ट का फैसला बिल्कुल सही है, वह इसलिए कि प्रमोशन के बाद वह अपने मातहत पर सत्ता का दुरुपयोग कर सकता है और क्रीमिलेयर का क्या हुआ?

- रेलवे यूनियन की केंद्रीय उपाध्यक्ष सीमा कौशिक कहती हैं कि अभी ये मुद्दा खत्म नहीं हुआ है। राज्य सरकारों के ऊपर छोड़ दिया है। मध्यप्रदेश में माई के लाल हैं तो देख लो तुम्हारे हिसाब से।

- रंजीता वैष्णव ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही बताया है। वैष्णव ने मांग भी की है कि इस फैसले को तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

- दीपक भारद्वाज नामक यूजर लिखते हैं कि सरकार कुछ न कुछ जोड़-तोड़ कर सकती है। इसलिए अधिक खुश होने की जरुरत नहीं है।

- रेलवे में काम करने वाले अशोक तिवारी लिखते हैं कि काम में आरक्षण कोई मायने नहीं रखता है। यदि कार्य अच्छा करेंगे तो प्रमोशन के लिए किसी आरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

- बैंक कर्मचारी हरिश कुमार वर्मा लिखते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात कही है, यदि राज्य सरकार चाहे तो आरक्षण दे सकती है।

-संदीप व्यास नामक व्यक्ति ने करारा तंज कसते हुए लिखा हैं कि यदि सरकार चाहे तो वोटबैंक को देखते हुए दो माह बाद होने वाले चुनाव से पहले अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दे, हम सरकार पलट देंगे।