
encroachment
जयपुर। गांवों में अतिक्रमियों को रेवडिय़ां बांटने की चल रही सरकारी कवायद में ५० हजार बीघा से ज्यादा जमीन अतिक्रमियों के पास जाने की आशंका है। दशकों से खाली पड़ी जमीन गांवों में बच्चों के खेलने-कूदने, सामाजिक कार्यों में काम आ रही है।
इस जमीन के खत्म होते ही गांवों में लगने वाली चौपाल का भी अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। सरकारी मंशा की जानकारी मिलते ही गांवों में ऐसे लोग भी जमीन दबाने में जुट गए हैं, जो अभी तक अतिक्रमी की श्रेणी में नहीं थे। मौटे तौर पर माना जा रहा है कि प्रदेश के ४५ हजार गांवों में करीब ५ लाख अतिक्रमियों को जमीन की रेवडिय़ां बंटेगी। हर गांव में १० से १५ लोगों को पट्टे दिए जाना कोई बड़ी बात नहीं।
ऐसे में यदि एक व्यक्ति को ३०० गज का भी पट्टा दिया जाता है तो १५ करोड़ गज से ज्यादा जमीन पर पट्टे काट दिए जाएंगे। ऐसे में ५० हजार बीघा से ज्यादा सरकारी जमीन सरकारी खाते से समाप्त हो जाएगी। उधर, अतिक्रमियों को लाभ देने के लिए सरकारी की इस योजना के सामने आते ही सरपंचों की राजनीति तेज हो गई हैं। लोग उनसे सम्पर्क करनले लग गए हैं। बड़े शहरों को छोड़ दें तो दूर दराज के गांवों में तो प्रति बीघा डीएलसी रेट ही हजारों में हैं। ऐसे में पांच से दस हजार में लोगों को पट्टे मिल जाएंगे।
तो बढ़ेंगे झगड़े
शहर ही नहीं गांवों में एक-एक कदम जमीन को लेकर कई बार खूनी संघर्ष के मामले में सामने आ चुके हैं। ऐसे में सरकारी जमीन पर ही कब्जों को लेकर गांवों में जंग शुरू हो जाए तो भी बड़ी बात नहीं। राजस्व विभाग के अधिकारी और पटवारियों की मानें तो गांवों में तो सरकारी जमीन पर भी कब्जे को लेकर लोग झगड़ते रहते हैं। लेकिन पुलिस कार्रवाई के भय से अब तक जमीन कब्जे से बची हुई थी। लेकिन अब तो यह काम सरकार ही करा रही है।
कब्जा आसान
सरकार ने कब्जे १ जनवरी २०१७ से पहले के होने की समय सीमा लागू की है। ऐसे में ९ से १० माह पुराना कब्जा बताना कोई बड़ी बात नहीं है। इसकी वजह यह है कि गांवों में मकान नंबर या कॉलोनी का नाम नहीं होता। मोहल्ला ही लिखा होता है।
गांवों का बिगड़ेगा भूगोल...
सामाजिक कार्यों में पीढिय़ों से उपयोग में आ रही जमीन अब अतिक्रमियों को बांटा जाना गांवों के भूगोल, पर्यावरण और भविष्य के लिए आत्मघाती कदम साबित होगा। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो अतिक्रमियों की नजर अब तक सिवायचक जमीन तक ही रहती थी। वे अब इस जमीन पर पट्टे कटने के बाद चरागाह, वन, रास्ते, गैर मुमकिन पहाड़ और अन्य प्रतिबंधित भूमियों पर कब्जे के लिए आगे बढ़ेंगे, जो सरकार के लिए बड़ा सरदर्द साबित होगा।
Published on:
1 Oct 2017, 1:58 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.