
Real estate
आगरा। रियल एस्टेट का हाल इन दिनों बहुत बुरा है। शहर का यह करोबार आज कल बेतहाशा महंगाई और मंदी के दौर से गुजर रहा है। नोटबंदी के बाद इस कारोबार की हालत बिगड़ गई थी, लेकिन सर्किल रेट की वृद्धि ने और झटका लगा दिया है। अब आलम ये हुआ कि राजस्व में काफी हद तक गिरावट आई है। जुलाई की तुलना में अगस्त में रजिस्ट्री दफ्तरों में कम ही खरीदार और विक्रेताओं की दस्तक नजर आई।
मांगी गईं थी आपत्तियां
सर्किल दरें एक अगस्त को लागू हुईं थी, सर्किल दरें लागू होने से पूर्व आपत्तियां मांगी गई थीं। जमीन से जुड़े कारोबारी और जानकारों ने कहा था कि सर्किल दरें न बढ़ाई जाएं, इसके पीछे तर्क दिया गया था कि एक तो पहले से ही रियल एस्टेट कारोबार ठंडा पड़ा हुआ है, उसके बाद सर्किल रेट बढ़ गईं तो काफी हद तक इस कारोबार को नुकसान होगा।
नहीं दिया ध्यान
कारोबारियों की इस आपत्ति पर जिला प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। एक अगस्त को सर्किल दरें बढ़ा दी गईं। वह भी इतनी कि लोग अब छोटा सा घर खरीदने में हिचक रहे हैं। परिणाम ये है कि रीयल एस्टेट में और गिरावट आएगी। राजस्व का ग्राफ भी घट गया है। रजिस्ट्री कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है। कई इलाकों की 10 तो कई क्षेत्रों की 15 फीसद तक रेट बढ़ाई गई है। यदि यही हाल आने वाले दिनों में रहा, तो भारी गिरावट देखने को मिलेगी।
यूं गिरी रजिस्ट्री की संख्या
जुलाई में सर्वाधिक 4190 रजिस्ट्री हुईं और 3014 लाख राजस्व अजिर्त हुआ, वहीं एक अगस्त को सर्किल दरें लागू होने के बाद ये आंकड़ा घट गया। अगस्त में 3602 रजिस्ट्री हुईं, जिसमें 2558.98 लाख का राजस्व आया। रजिस्ट्री कार्यालय के मुताबिक रजिस्ट्री की संख्या लगातार घट रही है। रीयल एस्टेट से जुड़े मनोज यादव ने बताया कि रीयल एस्टेट के हालातों पर जिला प्रशासन को गौर करना चाहिए। रियल एस्टेट की स्थिति पहले से ही खराब चल रही थी, ऐसे में सर्किल दरें बढ़ाने का निर्णय गलत साबित हुआ।
Published on:
13 Sep 2017, 1:10 PM IST
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