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Agni Nakshatram Ends 2026: क्या है अग्नि नक्षत्रम दोष और इस साल कब खत्म हो रही है यह दशा?

Agni Nakshatram Ends 2026: भीषण गर्मी और झुलसाती धूप से परेशान लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आ रही है। दक्षिण भारत के सबसे बड़े धार्मिक काल और कड़कड़ाती धूप के प्रतीक 'अग्नि नक्षत्रम' का समापन होने जा रहा है, जिससे न सिर्फ मौसम बदलेगा बल्कि सभी शुभ कार्यों पर लगा ब्रेक भी हट जाएगा। जानिए इस बार कब मिल रही है इस 'दोष' से मुक्ति और क्या है इसके पीछे की कहानी।

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भारत

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Manoj Vashisth

May 26, 2026

Agni Nakshatram ends 2026 date, Lord Murugan

Agni Nakshatram Ends 2026: : मई जून में सबसे गर्म दिन 2026 (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Agni Nakshatram Ends 2026: गर्मियों के मौसम में जब सूरज देवता अपने सबसे रौद्र रूप में होते हैं, तो मानो आसमान से आग बरसने लगती है। उत्तर भारत में जहां हम इसे नौतपा (Nautapa 2026) या लू के नाम से जानते हैं, वहीं दक्षिण भारत में इस बेहद गर्म समय को अग्नि नक्षत्रम (Agni Nakshatram) कहा जाता है। धार्मिकमान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। लेकिन अब आपके लिए राहत की खबर है। इस साल की सबसे भीषण गर्मी और अशुभ माने जाने वाले इस काल का अंत होने जा रहा है, जिससे लोगों को न सिर्फ तपती धूप से राहत मिलेगी बल्कि रुके हुए मांगलिक कार्य भी फिर से शुरू हो सकेंगे।

अग्नि नक्षत्रम क्या है और क्यों कांपते हैं लोग इसके नाम से?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव कृत्तिका नक्षत्र (जिसे अग्नि नक्षत्र भी कहते हैं) में प्रवेश करते हैं, तब अग्नि नक्षत्रम (Agni Nakshatram) की शुरुआत होती है। यह समय अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मई-जून के महीने में आता है।

दक्षिण भारत में इसे अग्नि नक्षत्रम दोष या कथरी (Katthhir) भी कहा जाता है। इस दौरान पड़ने वाली भयंकर गर्मी के कारण इसे बेहद अशुभ माना जाता है।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार:

  • इस काल में की गई कोई भी यात्रा सफल नहीं होती।
  • बीमारियां ठीक होने में सामान्य से बहुत ज्यादा वक्त लेती हैं।
  • इस दौरान किसी को उधार दिया गया पैसा वापस मिलने की संभावना न के बराबर होती है।
  • शादी-ब्याह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर पूरी तरह रोक होती है।

खगोलीय गणित: असल में यह वो समय होता है जब सूर्य देव भरणी नक्षत्र के तीसरे और चौथे चरण, कृत्तिका नक्षत्र के चारों चरणों और रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण से होकर गुजरते हैं। इसी वजह से पृथ्वी पर तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है।

साल 2026 में कब हो रहा है इसका समापन?

इस साल अग्नि नक्षत्रम (Agni Nakshatram) की शुरुआत मई के पहले हफ्ते (4 मई) से हुई थी। अब हर किसी को इसके खत्म होने का इंतजार है।

अग्नि नक्षत्रम समापन की तिथि: 28 मई 2026 (गुरुवार)

28 मई को इस दोष के समाप्त होते ही सूर्य की तपिश कम होने लगेगी और दक्षिण भारत सहित देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून की गतिविधियां भी जोर पकड़ने लगेंगी।

भगवान मुरुगन से जुड़ा है इसका खास कनेक्शन

भले ही आम लोगों के लिए यह समय भीषण गर्मी और दोष का हो, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से यह भगवान मुरुगन (स्वामी कार्तिकेय) को समर्पित एक महान उत्सव का समय होता है। तमिलनाडु और उसके आसपास के राज्यों में इसे एक भव्य त्योहार के रूप में मनाया जाता है।

इस दौरान पलानी, स्वामीमलाई, तिरुत्तानी, तिरुचेंदूर और पलमुथिरशोलई जैसे प्रसिद्ध मुरुगन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त इस झुलसाती गर्मी में भी भगवान को प्रसन्न करने के लिए अनूठी परंपराएं निभाते हैं:

गिरि वीदी की परिक्रमा:

सुबह और शाम के समय लोग पहाड़ियों के चक्कर काटते हैं। माना जाता है कि इस दौरान कदंब के पेड़ों (जो भगवान मुरुगन के प्रिय हैं) से छूकर आने वाली हवा सेहत के लिए संजीवनी का काम करती है।

कावेरी जल से अभिषेक:

कई कट्टर भक्त पवित्र कावेरी नदी से जल भरकर लाते हैं और अपने आराध्य का 'अभिषेक' करते हैं। इस कावड़ यात्रा में लोक नर्तक और संगीतकार भी शामिल होते हैं, जिससे पूरा माहौल रंगीन हो जाता है।

मानसून की दस्तक

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अग्नि नक्षत्रम (Agni Nakshatram) का समाप्त होना इस बात का संकेत है कि अब केरल के तट पर मानसून दस्तक देने के लिए तैयार है, जो पूरे देश को ठंडक पहुंचाएगा।

28 मई को अग्नि नक्षत्रम के खत्म होते ही लोग राहत की सांस लेंगे और बाजारों में एक बार फिर शादियों और मांगलिक कार्यों की रौनक लौट आएगी।