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बिना कठिन तपस्या के कैसे मिलते हैं भगवान? संत कमल किशोर जी ने बताया सबसे सरल मार्ग

Sant Shree Kamal Kishore ji Nagar: संत श्री नागर ने ईश्वर को पाने का सबसे आसान रास्ता बताया है। इस आर्टिकल में उनके वचनों से समझिए, कलयुग में कैसे कठिन तपस्या के बिना भगवान मिल सकते हैं?

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 11, 2026

Sant shree kamal kishore ji nagar

Kalyug me bhagwan kaise milte hain by kamal kishore ji nagar: संत कमल किशोर जी ने बताया, भगवान को पाने का तरीका। (PC:AI)

Kalyug Me Bhagwan Kaise Milte Hain: धार्मिक और आध्यात्मिक पिपासुओं का हमेशा एक ही प्रश्न रहता है कि परमात्मा कैसे मिले? वो क्या तरीका है, क्या तरकीब है, जिससे वो मिलता है। कलियुग में जहां सब, इतनी व्यस्त दिनचर्या में उलझे हुए हैं, वहां क्या कोई आसान उपाय है उसे पाने का? इस प्रश्न का बेहद हृदयस्पर्शी उत्तर मालवा के संत श्री कमल किशोर जी नागर ने दिया है। उनकी कथाओं में वे इतने सरल अंदाज में बड़ा से बड़ा अध्यात्मिक दर्शन समझा देते हैं कि श्रोता भाव-विभोर हो उठते हैं।

मनुष्य जन्म से अच्छा कुछ नहीं

संत श्री कमल किशोर जी नागर कहते हैं, चौरासी लाख (84 Lakh) योनियों में भटकने के बाद ईश्वर की कृपा से मानव शरीर, मनुष्य जीवन मिलता है। इसे हम व्यर्थ की इच्छाओं में बर्बाद कर देते हैं। पूरा जीवन जिन चीजों में खुशी ढूंढ़ते हैं, वो केवल दुख देती हैं। अंतिम समय में केवल पछतावा हाथ रह जाता है। उनका भजन भी है, "सब उमर बीत गई धोखे में परिणाम न जाने क्या होगा।" पूरी जिंदगी बीत जाने से बेहतर है, पहले ही उस लोक की, मृत्यु के बाद की तैयारी कर ली जाए। वह काम समय रहते निपटा लिया जाए, जो हमारे जीवन का मूल उद्देश्य है। मूल उद्देश्य है, मोक्ष। मूल उद्देश्य है, परमात्मा की प्राप्ति। मूल उद्देश्य तो केवल एक ही, परम तत्व से मिलन। बातें हों तो, केवल परमात्मा की। केवल राम की, कृष्ण की, हरि की। क्योंकि हरि सब चिंताओं को हर परम आनंद बरसाते हैं। परम सुख देते हैं। सुकून केवल उसके धाम में, उसके सुमिरन, उसके भजन में ही है।

तो कैसे मिले परमात्मा?

परमात्मा का मिलन कलियुग में जितना कठिन मालूम होता है, उतना है नहीं। शास्त्र हमें यही बात बार-बार समझाते हैं। संत श्री नागर समझाते हैं, कलियुग में तो केवल 'नाम' ही आधार है। सिर्फ नाम से वो मिल सकता है। नाम में ही वो शक्ति है, जो जीव को दुनिया की माया से सुरक्षित रख सकती है। जीव की, मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है, काम, क्रोध, अहंकार, लोभ, मोह और ईर्ष्या। इससे नाम ही बचा सकता है। नाम को तो साधना पड़ेगा। भजन करना होगा। सारी समस्याओं से मुक्ति का केवल एक ही उपाय है, वह है नाम। करना पड़ेगा सुमिरन। करना पड़ेगा भजन।

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रामचरितमानस में बाबा तुलसी ने इसे बड़ी सरलता से समझाया है। संत तुलसीदास जी सुंदरकांड में लिखते हैं:

"कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई। जब तव सुमिरन भजन न होई।।"
अर्थ: हनुमान जी कहते हैं, हे प्रभु, विपत्ति, संकट, शोक, संताप, पीड़ाएं तो तभी जीव को घेरती हैं, जब आपका स्मरण और भजन न हो। इस बात को समझना जरूरी है कि, भगवान का नाम-स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। इसके बिना ही मनुष्य दुखों और समस्याओं में फंसता है। प्रभु का स्मरण सभी कष्टों का अंत कर देता है। नाम में बड़ी शक्ति है।

बाबा तुलसी ने कलयुग के दुखों से पार पाने का तरीका इस चौपाई में भी बताया है। वे कहते हैं, नाम के स्मरण से, नाम के सुमिरण से मनुष्य भवसागर से पार होकर, जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है। उसे फिर हमेशा के लिए भगवान के परम धाम में वास मिल जाता है।

कलयुग केवल नाम अधारा।
सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।।

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