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Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को तीन महासंयोगों के बीच मनाई जाएगी निर्जला एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त और उपाय

Nirjala Ekadashi Muhurat: निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इस दिन रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

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भारत

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Manoj Vashisth

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टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा

Jun 21, 2026

Nirjala Ekadashi Date 2026

Nirjala Ekadashi 2026 : निर्जला एकादशी पर बनेंगे तीन शुभ योग (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Nirjala Ekadashi Date 2026: इस साल ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी बेहद खास होने जा रही है। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून को शाम 6:13 मिनट पर होगा और इसका समापन अगले दिन 25 जून को शाम 8:09 मिनट पर हो जाएगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

इस बार एकादशी पर अद्भुत ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं। इस दिन (Nirjala Ekadashi 2026) शुभ शिव योग, रवि योग और सिद्ध योग का संयोग भी बन रहा है। माना जाता है कि, यह योग बेहद प्रभावशाली होता है, इसमें पूजा-पाठ करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं और सभी प्रकार के दोषों से राहत मिलती हैं।

एकादशी पर बन रहे हैं तीन शुभ योग

रवि योग: सुबह 5:25 मिनट से शुरू होकर शाम 4:29 मिनट तक

शिव योग: सुबह 10:22 मिनट से लेकर पूरे दिन रहेगा।

सिद्ध योग: सुबह 10:53 मिनट से पूरे दिन रहेगा।

निर्जला एकादशी के उपाय

नीतिका शर्मा ने बताया कि निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2026) के दिन दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विष्णु सहस्त्र का पाठ करने से कुंडली के सभी दोष समाप्त होते हैं। भोग में भगवान विष्णु को पीली वस्तुओं का प्रयोग करने से धन की बरसात होती है। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने बैठकर गीता का पाठ करने से पित्रों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

हालांकि, इस दिन कुछ गलतियों से बचना जरूरी है। ज्योतिषाचार्या ने सचेत किया कि माता तुलसी को विष्णु प्रिया कहा जाता है, शास्त्रों के अनुसार एकादशी पर तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए। इससे पाप के भागी बनते हैं क्योंकि इस दिन तुलसी भी एकादशी का निर्जल व्रत करती हैं। साथ ही विष्णु जी को पूजा में अक्षत (चावल) अर्पित न करें, क्योंकि श्रीहरि की उपासना में चावल वर्जित हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।