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Premanand Maharaj Quotes: भगवान नहीं अपने ‘लाला’ हैं श्री कृष्ण, जानें कर्म और भाग्य का यह दिव्य रहस्य

Premanand Maharaj Quotes: पूज्य प्रेमानंद महाराज के अनुसार श्री कृष्ण को भगवान मानकर दूर न करो, उन्हें ब्रजवासियों की तरह अपना 'लाला' और 'यार' बनाओ। जानें दान, भाग्य बदलने और सच्चे मित्र की पहचान पर महाराज श्री के अनमोल विचार।
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भारत

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Manoj Vashisth

May 24, 2026

Premanand Ji Maharaj Quotes, Shri Krishna Suvichar

Premanand Ji Maharaj Quotes: मैं तुम्हारा हूँ, हमेशा तुम्हारा रहूंगा...ठाकुर जी का यह पावन संदेश रोते हुए को भी हंसा देगा (फोटो सोर्स: bhajanmarg_official)

Premanand Maharaj Suvichar : श्री कृष्ण को भगवान मानकर दूर क्यों रखना, जब वो हमारे अपने 'लाला' बन सकते हैं? परम पूज्य संत श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज के सत्संग (Premanand Maharaj Ke Pravachan) का सार जीव का ईश्वर से सीधा और आत्मीय संबंध जोड़ना है। इस विशेष लेख में हम महाराज श्री के उन दिव्य सुविचारों (Premanand Maharaj Suvichar) को समेटकर लाए हैं, जो हमारी सोच और भक्ति की दिशा बदल देते हैं। ब्रज रस की अनन्य अनुभूति से लेकर कर्म, चिंतन और भाग्य बदलने के सामर्थ्य तक महाराज श्री के ये वचन जीवन की हर उलझन सुलझा देंगे।

ब्रज रस और ठाकुर जी से अपनेपन का भाव

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं दुनिया के लिए वो भगवान होंगे, पर ब्रजवासियों के लिए तो वो घर की चीज हैं, अपने लाला हैं। थोड़ा अपनेपन में आओ, अपने स्वरूप को पहचानो। जो बांके बिहारी को भगवान कहकर पुकारता है, वो बाहरी है; और जो लाला या बिहारी लाल कहता है, वही सच्चा ब्रजवासी है। सबके लिए वो जगतनियंता होंगे, पर हमारे लिए तो वो जीवनधन और यार हैं।

ठाकुर जी से ठाकुरशाही का संबंध

ब्रज की गोपियां कन्हैया को गोबर गिनने के लिए खड़ा कर देती थीं। वो ठाकुर, जिन्हें वेद-पुराण भी पूरी तरह नहीं समझ पाते, उन्हें अहीर की छोरियां छछिया भर छाछ पे नाच नचावे। अपने ठाकुर से ऐसा नाता जोड़ो कि वो भगवान न रहकर तुम्हारे अपने बन जाएं।

दान नहीं सेवा करो और कर्मों को कृष्णार्पण करो

सोने और लोहे की जंजीर

पाप कर्म अगर लोहे की जंजीर है, तो पुण्य कर्म सोने की जंजीर है। याद रखो, बंधन तो दोनों से ही होता है। इसलिए दान करने की भावना को सेवा में बदलो। जब किसी की मदद करो, तो सोचो त्वदीयं वस्तु गोविंद तुभ्यमेव समर्पये (हे प्रभु आपका दिया ही आपको अर्पण है)।

कृष्णार्पणमस्तु का दिव्य सूत्र

जब तुम अपने कर्मों को कृष्णार्पणमस्तु या राधावल्लभ अर्पणमस्तु कर देते हो, तो तुम्हारा कर्ताभाव (अहंकार) शिथिल हो जाता है। कर्म निर्दोष हो जाता है और बंधन का कारण नहीं बनता। नाम जप अधिक करो, परोपकार करो और इसी जन्म में अपना कल्याण निश्चित करो।

चिंतन का दिव्य प्रभाव और प्रभु का अटूट आश्वासन

जैसा चिंतन, वैसा जीवन

हम जिसका सोचते हैं, उसका प्रभाव तुरंत हमारे भीतर पड़ता है। यदि हम आंखें बंद करके इमली, नींबू या आंवले जैसी खट्टी चीजों का सिर्फ चिंतन भी करें, तो मुंह में पानी आ जाता है। जब भौतिक चीजों के चिंतन का इतना गहरा असर है, तो सोचो राधा-कृष्ण के नाम और रूप के चिंतन का अंतरात्मा पर कितना दिव्य प्रभाव पड़ेगा।

प्रभु का अटूट आश्वासन

ठाकुर जी हर जीव से कहते हैं मैं तुम्हारा हू, तुम्हारा ही रहूँगा और कभी उफ़ नहीं करूँगा। तुम चाहे जितना रूठना चाहो, रूठ लो, मैं तुमसे प्यार करता हूँ और कभी किसी से शिकवा नहीं करूँगा।'"

मनुष्य जीवन की महिमा, भाग्य और सच्चे मित्र की पहचान

भाग्य के निर्माता तुम स्वयं हो

"यह सोचना सबसे बड़ी भूल है कि अध्यात्म या सफलता किसी-किसी के भाग्य में ही लिखी होती है। तुम इस मनुष्य शरीर से अपना भाग्य खुद बदल सकते हो। जब तुम इस जीवन में साक्षात् भगवान को प्राप्त कर सकते हो, तो संसार में ऐसा क्या है जो तुम नहीं कर सकते? अपनी शक्ति को पहचानो।

सच्चे मित्र की पहचान

जीवन में महाराज श्री की एक बात हमेशा याद रखना जो तुम्हें गंदी बातें सिखाए, गंदी चेष्टाएं करे या गंदा रास्ता दिखाए, वो कभी तुम्हारा दोस्त नहीं हो सकता। कुसंग का तत्काल त्याग करो।"

महामंत्र: जो भी करो, भगवान को सामने देखकर करो, भगवत भाव में करो। इसी जन्म में मंगल हो जाएगा।