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Sury Dev Ki Aarti: पूजा के बाद आरती गान जरूरी, सूर्य देव की आरती से मिलेगा धन वैभव और मान

सूर्य देव की पूजा में कौन सी आरती पढ़ें इसको लेकर असमंजस में हैं तो यहां पढ़ें सबसे प्रचलित सूर्य देव की आरती (Sury Dev Ki Aarti)।
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Pravin Pandey

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Updated: 22 May 2023, 1:19 PM IST

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सूर्य देव की पूजा में इस आरती का पाठ शुभ होता है।

आरती भगवान की पूजा का अभिन्न अंग है, बगैर आरती गान के कोई पूजा पूरी नहीं होती है। इसलिए पूजा के आखिर में भगवान की आरती गाकर स्तुति करनी चाहिए। इससे भगवान प्रसन्न होकर भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं। इसी तरह जगत के दृश्य देव माने जाने वाले सूर्य देव की पूजा में भी आरती गाने का विधान है। जय कश्यप नंदन आरती से भगवान सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और भक्त को धन वैभव और मान देते हैं।

मिथुन संक्रांतिः अगले महीने 15 जून को सूर्य राशि परिवर्तन कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस महीने 15 जून गुरुवार को वृषभ संक्रांति होगी। इस दिन भगवान आदित्य की पूजा की जाएगी, भक्त सूर्य चालीसा, आदित्य हृदय स्त्रोत आदि का पाठ करेंगे। इस समय सूर्य देव की आरती गाना शुभ फलदायक होगी।

सूर्य देव की आरती (Sury Dev Ki Aarti)


जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चंदन॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी,मानस मल हारी॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।

सुर मुनि भूसुर वंदित, विमल विभवशाली।
अघ दल दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।

सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव बंधन भारी॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।

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कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरतअति मनसिज संतापा॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू पीड़ाहारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।

सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप नंदन, ॐ जय अदिति नंदन।