स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि इस सृष्टि में जो कुछ है वो शिव ही हैं...और सभी कुछ उन्हीं से ही उत्पन्न हुआ है और सब कुछ उन्हीं में विलीन होगा और विलय होता है, उनके अतिरिक्त सृष्टि और उसके बाहर कुछ नहीं है। जो भी जीव संसार में भी जन्म लेता है, उन्हीं का अंश है और अविद्या के साथ जन्म लेता है, जिससे अपने अस्तित्व को भूल जाता है। उसे यहां अपनी इसी अविद्या को दूर कर खुद को जानकर परब्रह्म से मिलन की यात्रा पूरी करना है और तब तक यह जीवन चक्र चलता ही रहता है जब तक वह अपने जीव उद्देश्य को पा न ले।