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Shrawan Month: सावन के हर सोमवार का अपना खास महत्व, जानें किस दिन करें भगवान शिव के किस रूप की पूजा

Shrawan Somvar: सावन के सोमवार में कब किसकी पूजा करें...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

•

Updated: 23 Jul 2021, 6:11 PM IST

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sawan shiv puja on every somvar

सावन भगवान शिव का अति प्रिय मास है। इस बार सावन का महीना उदया तिथि से 25 जुलाई से शुरु हो रहा है, जो सावन पूर्णिमा यानि रक्षाबंधन के दिन 22 अगस्त 2021 को समाप्त होगा। शास्त्रों में सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय माह बताया गया है। दरअसल सावन माह चातुर्मास मास के चार माहों में से एक माह है।

चातुर्मास में चूकिं भगवान विष्णु योगनिद्र में रहते हैं, इसी वजह से दौरान भगवान शिव ही पालनकर्ता होते हैं और वहीं भगवान विष्णु के भी कामों को भी देखते हैं, यानि सावन के महीने में त्रिदेवों की सारी शक्तियां भगवान शिव के पास ही होती है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस बार सावन मास में चार सोमवार हैं। पुराणों के अनुसार सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवार के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं।

वहीं इनकी कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इन्हीं के आशीर्वाद से निर्धन को धन और नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।

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सावन में सोमवार का है विशेष महत्व:
पं. शर्मा के मुताबिक सावन मास में प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व है। सामान्यत: सावन में चार सोमवार होते हैं, लेकिन कभी कभी पांच सोमवार भी आते हैं। सभी सोमवार की पूजा के लिए मंत्र अलग-अलग हैं। मान्यता है कि नियमपूर्वक पूजा करने से भगवान शंकर की कृपा हमेशा भक्तों पर बनी रहती है। ऐसे में इस बार भी सावन में चार सोमवार ही पड़ रहे हैं।

1. पहले सोमवार को महामायाधारी की पूजा: - सावन के पहले सोमवार को महामायाधारी भगवान शिव की आराधना की जाती है। पूजा क्रिया के बाद शिव भक्तों को ‘ऊं लक्ष्मी प्रदाय ह्री ऋण मोचने श्री देहि-देहि शिवाय नम: का मंत्र 11 माला जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और ऋण से मुक्ति मिलती है।

2. दूसरे सोमवार को करें महाकालेश्वर की पूजा:- दूसरे सोमवार को महाकालेश्वर शिव की विशेष पूजा करने का विधान है। श्रद्धालु को ‘ऊं महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नम: मंत्र का रुद्राक्ष की माला से कम से कम 11 मामला जाप करना चाहिए। महाकालेश्वर की पूजा से सुखी गृहस्थ जीवन, पारिवारिक कलह से मुक्ति, पितृ दोष व तांत्रिक दोष से मुक्ति मिलती है।

3. तीसरे सोमवार को अर्द्धनारीश्वर की पूजा:- सावन की तृतीय सोमवार को अर्द्धनारीश्वर शिव का पूजन किया जाता है। इन्हें खुश करने के लिए ‘ऊं महादेवाय सर्व कार्य सिद्धि देहि-देहि कामेश्वराय नम: मंत्र का 11 माला जाप करना श्रेष्ठ माना गया है।

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इनकी विशेष पूजन से अखंड सौभाग्य, पूर्ण आयु, संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा, कन्या विवाह, अकाल मृत्यु निवारण व आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है।

4. चौथे सोमवार को तंत्रेश्वर शिव की आराधना:- चौथे सोमवार को तंत्रेश्वर शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन कुश के आसन पर बैठकर ‘ऊं रुद्राय शत्रु संहाराय क्लीं कार्य सिद्धये महादेवाय फट् मंत्र का जाप 11 माला शिवभक्तों को करनी चाहिए। तंत्रेश्वर शिव की कृपा से समस्त बाधाओं का नाश, अकाल मृत्यु से रक्षा, रोग से मुक्ति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।


ये है पूजन विधि :-
गंजा जल, दूध, शहद, घी, शर्करा व पंचामृत से बाबा भोले का अभिषेक कर वस्त्र, यज्ञो पवित्र, श्वेत और रक्त चंदन भस्म, श्वेत मदार, कनेर, बेला, गुलाब पुष्प, बिल्वपत्र, धतुरा, बेल फल, भांग आदि चढ़ायें। उसके बाद घी का दीप उत्तर दिशा में जलाएं। पूजा करने के बाद आरती कर क्षमार्चन करें।

शिव पूजा से मिलने वाले फल-

1. इससे रोगों से मुक्ति मिलती है।

2. शरीर में अद्भूत ऊर्जा की अनुभूति होती है।

3. शक्ति में बढ़ोतरी होती है।

4. मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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5. अकाल मृत्यु और भय से मुक्ति मिलती है।

6. कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर की प्राप्ति होता है।

7. नवीन कार्य की पूर्ति होती है।

8. ग्रहों से शांति होती है।

9. संतान सुख की प्राप्ति होती है।

10. आरोग्यता आती है।

11. नौकरी की प्राप्ति होती है।

12. समस्ता बाधाओं से मुक्ति होती है।


सावन में न करें:
1. परिवार में कलह तो दुखद ही होता है। लेकिन,सावन में जीवनसाथी के साथ खट-पट, वाद-विवाद और अपशब्दों का प्रयोग नुकसानदायक होता है। इन दिनों शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना से दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है। इसलिए जब मन-मुटाव की नौबत आए तो शिव-पार्वती का पूजन करना चाहिए।

2. सावन शिव का माह है, इसलिए शिव भक्तों का अपमान भी कभी नहीं करना चाहिए। शिव के भक्तों का सम्मान शिव की सेवा के समान ही माना गया है। इस वजह से कई लोग कांवड़‌ियों की सहायता करते हैं।

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3. इस पूरे माह व्यक्ति को सात्विक जीवन बिताना चाहिए। क्योंकि शिवजी इन दिनों विष्णु के कार्य संभालते हैं, इसलिए सावन में मांस, मदिरा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इनसे दूर रहेंगे तो मन में शांति रहेगी, वहीं गुस्से पर कंट्रोल भी आसानी से कर पाएंगे।

4. शास्त्रों में बताया गया है कि श्रावण मास में दूध का सेवन ठीक नहीं होता है। यही कारण है कि इसीलिए भगवान शिव का अभिषेक दूध से करने का विधान बताया गया है। दूध से दूर रहने पर वात संबंधी रोग नहीं होते हैं।

5. श्रावण मास के दौरान बैंगन नहीं खाना चाहिए। बैंगन को अशुद्ध माना गया है, इसलिए द्वादशी, चतुर्दशी के दिन और कार्तिक माह में भी खाने को प्रतिबंधित किया गया है।

6. इस माह साग का सेवन भी शास्‍त्रों के अनुसार उचित नहीं माना गया है। माना जाता है कि इसके सेवन से सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

7. सावन में नंदी यदि घर के दरवाजे पर आए तो उसे भगाने की बजाय कुछ खाने को देना चाहिए। नंदी को मारना शिव की सवारी का अपमान करना माना गया है।

8. क्रोध में अपशब्द भी किसी को नहीं करना चाहिए, वहीं बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। इससे शिवजी प्रसन्न होते हैं।