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Vinayak Chaturthi June 2021: ज्येष्ठ मास की विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी...
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भोपाल

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Deepesh Tiwari

•

Updated: 4 Jun 2021, 4:29 PM IST

vinayaka chaturthi 2021

vinayaka chaturthi June 2021

हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। वहीं साल में श्री गणेश के प्रमुख दिनों में Chaturthi Tithi को विशेष माना जाता है। जो हर चंद्र महीने में दो आती हैं। ऐसे में माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार इन तिथियों पर भगवान Shri Ganesh की पूजा अर्चना करने से सारे संकट टल जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि होने के साथ यश की प्राप्ति होती है।

ऐसे में इस बार सोमवार, 14 जून 2021 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पड़ रही है, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा।

विनायक चतुर्थी जून 2021: ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी तिथि
प्रारंभ- 13 जून रात 09 बजकर 40 से
समाप्त- 14 जून रात 10 बजकर 34 मिनट तक

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पूजा शुभ मुहूर्त:
पंडित एके शुक्ला के अनुसार इस दिन यानि 14 जून 2021 को पूजा का मुहूर्त 10:58 AM से 01:45PM तक का है। यानि पूजा मुहूर्त की कुल अवधि 02 घंटे 47 मिनट की है।

14 जून, 2021 का पंचांग...
तिथि : चतुर्थी, 22:31 तक
नक्षत्र : पुष्य, 20:30 तक
योग : ध्रुव, 09:20 तक
प्रथम करण : वणिजा, 10:09 तक
द्वितिय करण : विष्टि, 22:31 तक
वार : सोमवार

शुभ मुहूर्त
अभिजीत : 12:00 − 12:53
अमृत कालम् : 13:40 − 15:23

अशुभ मुहूर्त
गुलिक काल : 14:07 − 15:47
यमगण्ड : 10:46 − 12:26
दूर मुहूर्तम् : 03:48 − 03:50
: 03:55 − 03:57
राहू काल : 07:25 − 09:06

दरअसल Hindu panchang के अनुसार हर महीने में दो चतुर्थी तिथि होती हैं। इस तिथि को भगवान गणेश की तिथि माना जाता है। इसमें अमावस्या के बाद आने वाली शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्णपक्ष की तिथि संकष्टी चतुर्थी कहलाती है।

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गणेश जी का नाम विनायक होने के कारण इसे विनायकी चतुर्थी व्रत भी कहा जाता है। वहीं कई भक्त विनायकी चतुर्थी व्रत को वरद विनायक चतुर्थी के रूप में भी मनाते हैं।

विनायक चतुर्थी का महत्व
विनायक चतुर्थी पर श्री गणेश की पूजा दिन में दो बार की जाती है। एक बार दोपहर में और एक बार मध्याह्न में। मान्यता है कि विनायकी चतुर्थी के दिन व्रत करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। सभी मनुष्यों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और समस्त सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

वहीं भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, समृद्धि, और सौभाग्य का देवता भी माना जाता है और किसी भी शुभ काम की शुरूआत प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता गणेश जी के पूजन से ही होती है।

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विनायक चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा...
: ब्रह्म मूहर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण करें।

: दोपहर पूजन के समय अपने सामर्थ्य के अनुसार सोने, चांदी, पीतल, तांबा, मिट्टी अथवा सोने या चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित करें। और संकल्प के बाद षोडशोपचार पूजन कर श्री गणेश की आरती करें।

: इसके बरद श्री गणेश की मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ाएं और ‘ॐ गं गणपतयै नम:’ का जाप करें।

: प्रतिमा पर 21 दूर्वा दल चढ़ाएं। दूर्वा एक प्रकार की घास का नाम है, जो श्री गणेश को अत्ति प्रिय है।

: श्री गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं।

: पूजन के समय श्री गणेश स्तोत्र, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें।

: ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें।

: शाम के समय गणेश चतुर्थी कथा, श्रद्धानुसार गणेश स्तुति, श्री गणेश सहस्रनामावली, गणेश चालीसा, गणेश पुराण आदि का स्तवन करें।

: संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करके श्री गणेश की आरती करें।

: शाम के समय भोजन ग्रहण करें।